आखिर कब मिलेगा लमती की जनता को न्याय? – 10 वर्षों से सड़क का इंतजार, अब मौत के साए में गुजर रही ज़िंदगी”

जबलपुर-शहर के लमती क्षेत्र की सड़कों की हालत देखकर यही सवाल उठता है कि क्या यह शहर ‘स्मार्ट सिटी’ योजना का हिस्सा है या फिर प्रशासन की अनदेखी की भेंट चढ़ चुका एक उपेक्षित कोना? लमती क्षेत्र की सड़कों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंख मूंदे बैठे हैं। नालियों का अभाव, सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और बारिश के पानी से भरे कीचड़ से लोगों का चलना तक दूभर हो गया है।स्थानीय रहवासी अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि”हम विगत 10 वर्षों से सड़क और नाली की मांग कर रहे हैं। कई बार नगर निगम को लिखित शिकायतें दी गईं, पार्षद से लेकर विधायक तक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन किसी ने भी आज तक हमारी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। बरसात के मौसम में हालात और बदतर हो जाते हैं। कई बार लोग गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा?”सिर्फ चुनाव में दिखते हैं नेता, फिर गायब हो जाते हैं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, जीतने के बाद क्षेत्र की समस्याओं की सुध नहीं ली जाती। जनता का कहना है कि सड़कों पर घूमने वाले पार्षद अब AC दफ्तरों में बैठते हैं, और विधायक तो इलाके की तरफ झांकते भी नहीं।नगर निगम की चुप्पी, लोगों की परेशानी
नगर निगम जबलपुर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कमिश्नर स्तर तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन आज तक न तो किसी इंजीनियर ने स्थल निरीक्षण किया और न ही कोई टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। लगता है प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है।बुजुर्ग, महिलाएं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक दिक्क जर्जर सड़क के चलते क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों को स्कूल, अस्पताल, बाज़ार तक पहुंचने में काफी कठिनाई होती है। बुजुर्गों का बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। बारिश के दौरान तो कई घरों में पानी भर जाता है।सामूहिक आंदोलन की चेतावनी
रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क और नाली निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। रहवासियों का कहना है कि यह अब सिर्फ सुविधा की नहीं, बल्कि जान-माल की सुरक्षा की लड़ाई है।
लमती की जनता अब थक चुकी है — बार-बार शिकायत, बार-बार आश्वासन, लेकिन समाधान शून्य। क्या प्रशासन किसी की मौत के बाद जागेगा? यह सवाल अब सिर्फ लमती की नहीं, पूरे जबलपुर की प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवालिया निशान है।

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Author: aajtak24x7

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