कन्हैया की छठी (छठी पर 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया)एवं पूतना वध और कालियादाह की कथा का हुआ रसपान*

*कन्हैया की छठी (छठी पर 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया)एवं पूतना वध और कालियादाह की कथा का हुआ रसपान*

 

 

औरैया –ब्यास जी के मुखारबिन्दु से भगवान कृष्ण की लीलाओ में जब कंस को यह पता चला कि उसे मारने वाला पैदा हो गया है तो वह भयभीत हो गया उसने पूतना नामक राक्षसी को बाल रूप कन्हैया को मारने के लिए गोकुल भेजा पूतना राक्षसी एक सुन्दर महिला का रूप धरकर गोकुल में नंदबाबा के यहां पहुंची जहां उसने पालने में लेटे बालरूप कन्हैया को अपने गोद में लेकर अपने अपना स्तनपान कराने लगी जिसमें उसने पहले से जहर लगा रखा था कन्हैया उसकी करतूत को समझ गए उन्होंने उसके स्तनपान के साथ ही उसके प्राण खींचने लगें जिससे वह व्याकुल हो कर अपना असली रूप धरकर गोकुल से बाहर भागी लेकिन बालरूप कृष्ण ने उसके स्तनपान के साथ ही उसके प्राण हर लिए इस प्रकार पूतना नामक राक्षसी का अंत हो गया

कंस ने एक एक करके कई राक्षसों जैसे बकासुर, अघासुर राक्षसों को कन्हैया का का वध करने के लिए गोकुल भेजा लेकिन कन्हैया ने कंस द्वारा भेजे सभी राक्षसों का वध कर दिया।

इधर नंदबाबा ने जब राक्षसों का ज्यादा उत्पात देखा तो वह सभी गोकुल वासियों सहित वृंदावन में आकर रहने लगे। कन्हैया वृंदावन में माखन चोरी से लेकर कई अपनी लीलाएं कर रहे थे वृंदावन में बालरूप कृष्ण की लीलाओं को देख देख सभी वृंदावन वासी और नंदबाबा एवं माता यशोदा बहुत प्रसन्न होते थे एक दिन कन्हैया अपने मित्रों के साथ गेंद खेल रहे थे तो वह गेंद यमुना में उस स्थान पर चली गई जहां कालिया नाग रहता था कन्हैया गेंद लाने के लिए साथियों के मना करने के बाद भी यमुना में कूंद पड़े जहां कालिया नाग ने उन्हें जकड़ लिया लेकिन जब कन्हैया ने जब अपना शरीर बढ़ाया तो कालिया नाग की पकड़ ढीली पड़ने लगी और कन्हैया उसकी पकड़ से निकल कर कालियानाग के फ़नों पर नृत्य करने लगे। इधर ग्वाले दौड़कर नंदबाबा एवं माता यशोदा के पास पहुंच कर कन्हैया के कालियादाह में जाने की खबर सुनाई तो सभी लोग दौड़कर यमुना किनारे पहुंचे तो क्या देखा कि उनका कन्हैया कालिया नाग के फनों पर नृत्य कर रहा है। इस प्रकार से कन्हैया ने कालिया नाग को यमुना त्यागकर अन्य स्थान जाने का आदेश दिया, कालिया नाग कन्हैया के आदेशानुसार यमुना छोड़कर अन्य स्थान पर चला गया यह देखकर सभी वृंदावन वासी कन्हैया की जय जयकार करने लगे

 

उपस्थित लोग -सत्यनारायण मिश्रा, आचार्य मुखिया पण्डित जी, राजमणि तिवारी उर्फ लल्ला तिवारी जिलाध्यक्ष परशुराम सेवा समिति, निर्मल पाण्डेय, अजय अंजाम, ,रमाशंकर पांडेय (पुजारी), बलदाऊ सिंह, कृपानाथ तिवारी, हरियोगेश मिश्रा, शिव आसरे शुक्ला, ओ पी दीक्षित,शिवम मिश्रा, सन्नू तिवारी,रमेशचंद्र मिश्रा, प्रवीण शुक्ला,आनंद दीक्षित, राधाकृष्ण मिश्रा, योगेश दीक्षित,श्रवण शुक्ला, शिवनाथ वर्मा, अवधेश शुक्ला , चंद्रभान मिश्रा राजेश शुक्ला एवं सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे

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