लोकेशन —– कोयलीबेडा़/कांकेर
रिपोर्टर——-जतन बिश्वास
स्लाँग———नक्सलीयों का आत्मसमर्पण से लोगो को खत्म हुआ भय, 42 कि,मी,फाँसले मे बने 5 पुलियाँ ।सुगम हुआ यातायात
ऐंकर——— पखांजुर से कोयलीबेडा़ तक जाने के लिए (दोनो शहर कांकेर जिले मे है) 123 कि,मी,की सफर तय करना पड़ता था, वजह नदीयाँ पहाड़ एवं नक्सली आतंक,स्थानीय लोगो के माँग पर एवं क्षेत्र को सुरक्षित रखने की मंशा से सन 2008 मे प्रथम वार केंद्रीय रिजंर्व बलों की मुस्तैदी की गयी थी एवं 2012 मे सीमा सुरक्षा बलों की तैनाती क्षेत्रो के विभिन्न स्थानों मे किये जाने के पश्चात पगडण्डी वाले सड़क का बनवाने की कार्य हुई प्रारम्भ। 12 वर्ष के समयावधी मे फोर्स की निगरानी मे लगभग 1100 मीटर की पाँच पलियाँ निर्मित हुई। इसमे कोटरी नदी, वालेर नदी, खण्डी नदी, कटगाँव नदी,माहला नदीयाँ मे बनी सेतु। आपको बता दुँ कि जब नदी मे पुलिया नही बनी थी ,तब इस एरिया मे नक्सलियों का झुण्ड जैसे निकलकर अपनी आतंक का करतुत करते रहते थे ,एवं बडे़ बडे़ घटनाओं का अंजाम देते थे।जिसमे क ई दर्जन सुरक्षा बलों सहित ग्रामीणो को शहीद होना पडा़। वर्तमान पखांजुर से कोयलीबेडा़ ब्लाक आँफिस तक आने जाने मे 123 कि,मी,के बदले महज 42 कि,मी, की दुर तय करना पड़ता है। उल्लेख है कि वर्ष 2002 मे नक्सली आतंक से त्रस्त होकर इसी क्षेत्र के गाँव माहला के पुरे गाँव के लोग गाँव छोड़कर पखांजुर जाकर प्रशासन के समक्ष शरण लिये थे। उत्तर बस्तर कांकेर जिले अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिले के सबसे ज्यादा पुलिस नक्सली मुठभेढ़ इसी 42 कि,मी, क्षेत्र मे ही हुया करता था।एवं सैकडो़ नक्सलीयों का आत्म समर्पण इसी क्षेत्र सेहुआहै। जो अब सामान्य हुआ है ।ग्रामीणो केअनुसार अब नट्सल मुक्त क्षेत्र बनने से यातायात मे काफी सधार हुआ है।इसके लिये छत्तीसगढ़ के राज्य सरकार एवं केन्द्र की सरकार को धन्यवाद देता हुँ।


