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भक्तों की रक्षा के लिए प्रभु ने लिया विविध अवतार

भक्तों की रक्षा के लिए प्रभु ने लिया विविध अवता

 

संवाददाता महेंद्र पाण्डेय

 

तिलोई अमेठी

कस्बा सेमरौता में स्व. शिव कुमार अग्निहोत्री के आवास पर चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन अमरकंटक मध्य प्रदेश से पधारे कथा व्यास डॉ नरेन्द्र पाण्डेय जी महाराज ने विदुर, ध्रुव, भक्त प्रहलाद, भरत एंव अजामिल की कथा का विस्तार से वर्णन किया कथा व्यास ने कहा कि भगवान विविध अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं।

कथा व्यास ने विदुर की कथा सुनाते कहा कि भगवान् श्रीकृष्ण ने विदुर जी के घर जाकर केले के छिलकों का भी प्रेम पूर्वक भोग स्वीकार किया क्योंकि उसमें श्रद्धा और सच्चा प्रेम था।कथा व्यास ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया। हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप भगवान् विष्णु को शत्रु मानते थे। वहीं भक्त ध्रुव की कथा सुनाते हुए कहां की मात्र 5 वर्ष की आयु में भगवान को पाने का दृढ़ निश्चय कर तप किया जिससे प्रसन्न होकर स्वयं भगवान प्रकट हुए। भरत की कथा सुनाते हुए हिरन से प्रेम का विस्तार पूर्वक वर्णन किया इस धार्मिक प्रसंग को आत्मसात करने के लिए भक्त देर रात तक भक्ति के सागर में गोते लगाते रहे। कथा यजमान सुरेश कुमार अग्निहोत्री व मनोज कुमारी ने व्यासपीठ का आरती पूजन किया।इस अवसर पर कमलेश अग्निहोत्री,रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी, राजेश तिवारी बैजनाथ अग्निहोत्री गोटयी सिंह माता प्रसाद अवस्थी,अरुण मिश्रा,उदय शंकर शुक्ला,अभिषेक अग्निहोत्री,श्रवण सोनी,रमेश,मनीष,संजय अवस्थी सहित अन्य श्रोतागण मौजूद रहे।

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Author: aajtak24x7

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