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देवसर जनपद में नियमों की अनदेखी: दफ्तर तक सीमित पीसीओ, गांवों में विकास कार्य ठप*

*देवसर जनपद में नियमों की अनदेखी: दफ्तर तक सीमित पीसीओ, गांवों में विकास कार्य ठप

*आशुतोष चतुर्वेदी की रिपोर्ट सिंगरौली*

देवसर । जनपद पंचायत देवसर में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्थाएं पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीओ) द्वारा पंचायत समन्वयक अधिकारियों (पीसीओ) से उनके मूल कार्यों के बजाय कार्यालयीन लेखापाल (Accountant) का कार्य कराया जा रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और मैदानी निगरानी पर पड़ रहा है।

कुर्सी से चिपके पीसीओ, फील्ड से बनाई दूरी

नियमों के अनुसार, पीसीओ का मुख्य कार्य गांवों में जाकर विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत जांचना और हितग्राहियों की समस्याओं का निराकरण करना है। लेकिन देवसर जनपद में स्थिति इसके विपरीत है। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश पीसीओ महीनों से फील्ड में नहीं निकले हैं। वे जनपद कार्यालय में बैठकर लेखा-जोखा और बाबूगिरी के कार्यों में व्यस्त हैं।

लेखापाल का काम और पीसीओ की मनमर्जी

जनपद पंचायत में स्वीकृत लेखापाल के पदों के बावजूद, पीसीओ को यह जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि वित्तीय लेन-देन और कागजी खानापूर्ति में पीसीओ को लगाए जाने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका बढ़ गई है। जब निगरानी करने वाला अधिकारी ही दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाएगा, तो गांवों में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा?

जनता परेशान, जिम्मेदार मौन

पीसीओ के फील्ड में न जाने से ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा, आवास योजना और स्वच्छता मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर जनपद के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी अपनी ‘नई जिम्मेदारी’ का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

इस संबंध में जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से बात की गई, तो उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मांग की है कि पीसीओ को तत्काल उनके मूल कार्यों पर वापस भेजा जाए और लेखापाल का कार्य संबंधित कर्मचारियों से ही कराया जाए।

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Author: aajtak24x7