बरेला में ऐतिहासिक और भव्य रूप से मनाई गई भगवान महावीर की 2625वीं जयंती, धर्ममय हुआ पूरा नग
बरेला। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और “जियो और जीने दो” का दिव्य संदेश देने वाले 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर की 2625वीं जयंती इस वर्ष बरेला नगर में अत्यंत भव्य, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। नगर का कोना-कोना धर्ममय हो उठा, जहां सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति, श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस पावन अवसर पर समस्त जैन समाज सहित नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई और भगवान महावीर के सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातःकालीन बेला में हुई, जब सुबह 8 बजे भगवान महावीर की रजत पालकी में भव्य विमान यात्रा पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र से विधिवत रूप से प्रारंभ की गई।
यह शोभायात्रा अत्यंत आकर्षक, अनुशासित एवं भव्य थी, जिसमें सुसज्जित रथ, धार्मिक ध्वज, भजन मंडलियां, महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, युवा वर्ग और बच्चे उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए। “महावीर स्वामी की जय” के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरती हुई श्रद्धालुओं को मिष्ठान वितरण करती रही और जगह-जगह पुष्पवर्षा एवं स्वागत किया गया।
यह दिव्य शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए श्री विद्या शैल धाम पहुंची, जहां मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां श्रावक श्रेष्ठी राकेश जैन (मिट्ठू भैया) के करकमलों से विधिवत ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान सुश्री अदिति एवं हर्षिता द्वारा प्रस्तुत ध्वज गीत ने कार्यक्रम में भक्ति का अद्भुत संचार किया और उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा।
इसके पश्चात भगवान महावीर का नैमित्तिक पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया।
अपराह्न काल में दोपहर 2:30 बजे से महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन किया गया, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक बोलियों में भाग लेते हुए 108 रजत कलशों से भगवान का अभिषेक किया। यह दृश्य अत्यंत दिव्य, अलौकिक और मनोहारी था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
महामस्तकाभिषेक के उपरांत समरसता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन सामाजिक समरसता, एकता और भाईचारे का प्रतीक बना।
इस भव्य आयोजन में प्रशिक्षु आई.पी.एस. शुभम सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतीक दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने भगवान महावीर के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
रात्रिकालीन कार्यक्रमों के अंतर्गत पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस दौरान अर्हम योग प्रणेता प्रणम्य सागर द्वारा रचित “श्री वर्धमान स्तोत्र” के 64 काव्यों का संगीतमय पाठ किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ सैकड़ों दीपों की रोशनी में परिसर अलौकिक प्रतीत हो रहा था।
कार्यक्रम के अंत में आरती एवं भजनों के साथ श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण वातावरण में भगवान की आराधना की और आयोजन का समापन हुआ।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान महावीर के बताए मार्ग—अहिंसा, सत्य, संयम और करुणा—को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बना। बरेला में आयोजित यह भव्य महावीर जयंती समारोह आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।



