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किसानों की जमीन उजाड़ी, पेड़ काटे, मुआवजा अब तक नहीं” — टॉवर लाइन से पीड़ित किसानों का फूटा गुस्सा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन*

*किसानों की जमीन उजाड़ी, पेड़ काटे, मुआवजा अब तक नहीं” — टॉवर लाइन से पीड़ित किसानों का फूटा गुस्सा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन*

सतना

 

जिले के टॉवर लाइन से प्रभावित किसानों ने आज अमित गौतम जी की अगुवाई में कलेक्टर महोदय, सतना के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर वर्षों से चले आ रहे अन्याय, शोषण और लंबित मुआवजे के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसानों ने कहा कि उनकी खेती, पेड़-पौधे, जमीन और आजीविका सब कुछ टॉवर लाइन निर्माण की भेंट चढ़ गया, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन और दफ्तरों के चक्कर मिले।

किसानों का आरोप है कि टॉवर लाइन कंपनियों ने किसानों की निजी कृषि भूमि पर जबरन टॉवर और हाईटेंशन लाइन खड़ी कर दीं। हजारों पेड़ काट दिए गए, फसलें बर्बाद हुईं, खेतों की उपयोगिता खत्म हो गई, लेकिन आज तक अधिकांश किसानों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही न्याय।

ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2015 में कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रभावित किसानों को प्रति टॉवर एवं तार के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश जारी किए गए थे, परंतु आज भी बड़ी संख्या में किसान अपने हक के लिए भटक रहे हैं। किसानों ने कहा कि शासन के आदेश कागजों तक सीमित रह गए हैं और पीड़ित किसान वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ज्ञापन में किसान राजाभईया बागरी का मामला प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि उनकी निजी पट्टे की कृषि भूमि पर लगे लगभग 400 सागौन के वृक्ष वर्ष 2019 में इस आधार पर काट दिए गए कि वे टॉवर लाइन कार्य में बाधा बन रहे थे। कटे हुए सागौन को वन विभाग के डिपो ले जाकर नीलाम कर दिया गया, लेकिन आज तक नीलामी की राशि किसान को नहीं दी गई। किसान पिछले सात वर्षों से अपनी मेहनत और अधिकार की रकम के लिए शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहा है।

अब उसी भूमि पर पुनः बड़े हुए सागौन के वृक्षों को काटने के लिए एसडीएम ऊंचेहरा द्वारा आदेश जारी किया गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि नोटिस में सागौन के वृक्षों को गलत तरीके से “सुबाबुल” या अन्य सामान्य वृक्ष बताया गया और यह भी लिखा गया कि वह “आम रास्ता” है जिससे आम जनता को परेशानी होती है, जबकि वास्तविकता यह है कि वह किसान की निजी पट्टे की भूमि है, जहां कोई सार्वजनिक रास्ता नहीं है। किसान ने अपनी पूरी जमीन के चारों ओर बाउंड्री तार तक लगवा रखी है। किसानों ने कहा कि बिना मौके का सही निरीक्षण किए मनमाने आदेश जारी करना किसानों के साथ सीधा अन्याय है।

किसान राजाभईया बागरी ने स्पष्ट कहा कि —

“पहले 2019 में काटे गए सागौन की नीलामी राशि और पुराना मुआवजा दिया जाए, उसके बाद ही दोबारा पेड़ काटने दिए जाएंगे।”

किसानों ने यह भी मांग की कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार टॉवर और टॉवर लाइन से प्रभावित सभी किसानों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और वर्षों से लंबित प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

किसानों के समर्थन में समाजसेवी राजेश दुबे जी ने कहा कि किसानों के साथ हो रहा यह व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जो किसान अपनी जमीन और पेड़ों से जीवन चलाता है, उसे ही अपने हक के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शासन ने जल्द न्याय नहीं दिया तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान राजाभईया बागरी, अनूप तिवारी, पंकज कुमार उपाध्याय, सुरेन्द्र द्विवेदी, विद्याधर द्विवेदी, रामनाथ कोल, राजीव पांडेय, संजय उपाध्याय, धर्मेंद्र कुशवाहा, मूलचंद कुशवाहा, सुदर्शन मिश्रा, गोपाल सोनी, अशोक तोमर, राजीव तिवारी, रामआसरे चौधरी, संतोष तोमर सहित हजारों की संख्या में पीड़ित किसान उपस्थित रहे।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित कंपनियों की होगी।

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Author: aajtak24x7

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