द अबोड स्कूल के विद्यार्थी समर्थ का मॉडर्न स्कूल दिल्ली में प्रवेश
अमित वर्मा
करेली अगर आप शिक्षित हैं और शिक्षा सही तरीके से प्राप्त की है तो दुनियां की हर मंजिल पा ली जा सकती है। विद्यार्थी समर्थ किलेदार ने बिना ट्यूशन बिना टेंशन के ऐसा मुकाम हासिल किया है जहां पहुंचने के लिए मेहनत के साथ किस्मत का होना भी जरूरी है। द अबोड स्कूल के विद्यार्थी समर्थ ने मॉडर्न स्कूल बाराखम्बा-रोड दिल्ली में प्रवेश पाकर अपने हौंसलों की उड़ान दी है सपनों की उड़ान को- छोटे से ग्राम भुगवारा से नई दिल्ली तक तय की है । शहर नहीं, सपने बड़े होने चाहिए; सपने नहीं, हौंसले बड़े होने चाहिए आज के ऐ आई के युग में शिक्षा क्लासरूम की चार दीवारों और किताबों की सीमाओं से बाहर निकलकर रचनात्मकता,क्रियात्मकता,कला एवं आत्म-विश्वास से भरे सर्वागीणविकास के आँगन में आ खड़ी है। “पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब,खेलोगे कूंदोगे होगे खराब” यह लोकोक्ति अब प्रासंगिक नहीं रही है। द अबोड स्कूल ऑफ ड्रीम्स के छात्र मास्टर समर्थ किलेदार ने यह सिद्ध कर दिखाया। छठी कक्षा में पढ़ने वाले भुगवारा (करेली) नामक छोटे से कस्बे के होनहार बालक ने दिल्ली के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक विद्यालय मॉडर्न स्कूल बाराखम्बारोड में दाखिला पाकर यह साबित कर दिया कि सपनों को पंख शहर नहीं, हौसले देते हैं। मात्र 2 सीटों पर देशभर के होनहार छात्रों से प्रतिस्पर्धा करते हुए समर्थ ने न केवल प्रवेश परीक्षा पास की, बल्कि अपने आत्मविश्वास, सादगी और हाजिरजवाबी से इंटरव्यू पैनल को भी चकित कर दिया। द अबोड विद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न एक्टिविटीज़ एवं अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पियाड एग्ज़ाम्स की उपलब्धियों ने उन्हें प्रवेश का अव्वल दावेदार बनाया। यह उपलब्धि सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों और माता-पिता के लिए एक प्रेरणा है जो मानते हैं कि बिना ट्यूशन, बिना अतिरिक्त दबाव के भी शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है। 2017 में जब द अचोड स्कूल की शुरुआत हुई थी, तब समर्थ हमारे पहले विद्यार्थियों में से एक थे। विद्यालय ने उन्हें दिया एक खुशनुमा बचपन और बहुत सारा आत्म-विश्वास। तब से आज तक, उनकी कर्मठता, निरंतरता और जिज्ञासा ने हर शिक्षक को प्रभावित किया है। उन्होंने कभी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया, न ही कभी किसी डर या दबाव में आकर पढ़ाई की। बल्कि वे हमेशा कला, विज्ञान, भाषाओं, खेल और संगीत हर क्षेत्र में अपने पूरे मन और उत्साह से जुड़ते रहे। श्री सिद्धार्थ और श्रीमती नेहा किलेदार ने अपने बेटे को स्वतंत्र सोचने और खुद से सीखने की छूट दी किया कि समझदारी भरी परवरिश ही असली कोचिंग है। उन्होंने साबित समर्थ के पिता श्री सिद्धार्थ किलेदार ने द अबोड स्कूल को बताया कि मॉडर्न स्कूल एक प्रतिष्ठित लेगसी स्कूल है एवं उन्हें यह स्वप्न में भी उम्मीद नहीं थी कि समर्थ इतनी सहजता से दिल्ली के बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा कर सकता है। यहाँ के प्रिन्सिपल समर्थ की बुनियादी पढ़ाई से बहुत प्रभावित हैं और इसका पूरा श्रेय द अबोड स्कूल के शिक्षकों को जाता है। समर्थ की माँ श्रीमती नेहा किलेदार ने बताया कि समर्थ को इतनी छोटी उम्र में इतने बड़े विद्यालय में प्रवेश मिल जाना किसी सपने जैसा लगता है। हम हमारे शहर करेली का गौरव बढ़ाने द अबोड स्कूल ऑफ ड्रीम्स के पूरे परिवार की ओर से समर्थ को उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभकामनाएं देते हैं।


