

राज्यसभा सांसद नवीन जैन के आग्रह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जारी किया आदेश
धर्म नगरी मथुरा में हुआ मंगल प्रवेश, 8 मई तक धर्म की गंगा प्रवाहित करेंगी, जैन समाज में उत्साह
आईजा ने किया यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व सांसद नवीन जैन का आभार व्यक्त
सिरोंज। सांसद सदस्य नवीन जैन के प्रयासो से जैन साध्वी 105 आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी को उत्तर प्रदेश में राजकीय अतिथि दर्जा प्रधान करने पर आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया,मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष राजीव जैन सैनानी,प्रदेश सलाहकार अंकित जैन ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एंव सांसद सदस्य नवीन जैन का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि सांसद नवीन जैन द्वारा जैन साधु संतो एंव अन्य सामाजिक कार्यो के सदैव अग्रणी भूमिका निभाते है और हमेशा आगे खडें होकर मदद करते है। जिसको लेकर जैन समाज के पत्रकारो व नेताओं ने भी उप्र के मुख्यमंत्री व सांसद नवीन जैन का आभार व्यक्त किया।
राजकीय अतिथि का सम्मान दिए जाने की मांग – सांसद सदस्य नवीन जैन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र देते हुए दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के सर्वोच्च संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रमुख शिष्या सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक साध्वी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी को ’राजकीय अतिथि का सम्मान दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के सर्वोच्य संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रमुख शिष्या सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक साध्वी आर्यिकारत्ल श्री 105 पूर्णमति माताजी जो वर्तमान युग में भी कठिन तपस्या एवं साधना में लीन रहती हैं, ऐसी पूज्या आर्यिका माताजी का प्रथम बार उत्तर प्रदेश राज्य पदार्पण हुआ है और धर्मनगरी मथुरा में मंगल प्रवेश होने जा रहा है। पूज्य आर्यिका माताजी संयम के 36 वर्षों में भारत वर्ष के राज्यों में लगभग 76,000 कि.मी. से भी अधिक पद-विहार करती हुई एवं एक समय का आहार ग्रहण करती हुए निरंतर जन-जीवन को चेतना प्रदान करती हुई निज-कल्याण के साथ-साथ जन-कल्याण भी कर रही है। आर्यिका पूर्णमति माताजी केवल ’जैन संत ही नहीं. अपितु जन-जन की संत है“ पूज्य आर्यिका माताजी के माध्यम से शताधिक संस्थाओं को मार्गदर्शन प्राप्त होता है। जो सर्वधर्म समभाव की भावना को प्रबल करते हुए कमजोर वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए रादेव प्रयासरत है।
5 लाख से अधिक परिवारो को बनाया शाकाहारी – अपराधी से नहीं अपराध से घृणा करो की उक्ति को चरितार्थ करते हुए विभिन्न राष्ट्रीय कारागारों में पूज्य आर्यिका माताजी ने कैदियों को जीवन-बोध कराया और उनके जीवन को सुधारने में एक सहायक का कार्य भी किया है। मुख्य रूप से गध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात में रहने वाले लगभग 5 लाख से भी अधिक अर्जन परिवारों को शाकाहारी बना दिया। जिसके कारण ही गुरूमों आर्यिका पूर्णमति जी शाकाहार-प्रवर्तक कहलायी। पूज्या आर्यिका माताजी, पूर्वाचार्यों द्वारा वेदों में लिखित सिद्धांतो को वर्तमान में वैज्ञानिकी एवं तकनीकी भाषा से सरल रूप प्रदान कर धर्म से विमुख हुई युवा पीढ़ी में सरकारों का बीजारोपण करती है। भगवान महावीर, महात्मा बुद्ध, एवं गांधी जी द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतो का प्रचार-प्रसार करने में विशेष रुचि रखती है। साथ ही साथ डॉक्टर,एडवोकेट,वैज्ञानिक,चार्टर्डएकाउण्टेण्ट्स एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सामाजिक दायित्व का निर्वाहन करने के लिए समय-समय पर मार्गदर्शन प्रदान करती है। अनेकों-अनेक अलंकारो से अलंकृत ऐसी पूज्या आर्यिका माताजी का मंगल पदार्पण प्रथम बार उत्तर प्रदेश राज्य में हुआ है और पूज्या माताजी धर्मनगरी मथुरा में मंगल प्रवेश करेंगी। जिससे सभी जैन बंधु अति उत्साहित है और समस्त जैन समाज के साथ मैं स्वयं भी आपसे निवेदन करता हूँ कि पूज्या आर्यिका पूर्णमति माताजी को राजकीय अतिथि का सम्मान मिले।
सांसद के पत्र के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी हुआ आदेश – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के सर्वोच्च संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रमुख शिष्या सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक साध्वी आर्यिकारत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने आदेश जारी कर दिया है। नवीन जैन ने मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया है। इस अवसर पर सांसद नवीन जैन न बताया कि पूज्या आर्थिका माताजी संयम के 36 वर्षों में भारत में लगभग 76,000 कि.मी. से भी अधिक पद-विहार, एक समय का आहार और जन-जीवन को चेतना प्रदान करती हुई जन-कल्याण कर रही हैं। आर्यिका पूर्णमति गाताजी केवल ’जैन संत ही नहीं, अपितु जन-जन की संत हैं। पूज्या आर्थिका माताजी के माध्यम से शताधिक संस्थाओं को मार्गदर्शन प्राप्त होता है. जो सर्वधर्म समभाव की भावना को प्रबल करते हुए कमजोर वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए सदेव प्रयासरत है।


