अंकित श्रीवास्तव जबलपुर — सरकार और आबकारी विभाग के नियमों को धता बताते हुए शहर के कई शराब ठेके एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से अधिक दरों पर शराब बेच रहे हैं। खुलेआम नियमों की अवहेलना हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय बाजारों और शराब दुकानों पर निरीक्षण करने पर यह साफ सामने आया कि उपभोक्ताओं से शराब की बोतलों पर छपी अधिकतम कीमत से कहीं अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। कई स्थानों पर ग्राहकों को बिल तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे यह अवैध वसूली दस्तावेजों में दर्ज भी नहीं हो रही।
ग्राहकों का आरोप है कि यदि कोई एमआरपी का हवाला देकर विरोध करता है, तो उसे शराब देने से मना कर दिया जाता है या फिर अभद्र व्यवहार किया जाता है। खासकर रात के समय और सप्ताहांत पर यह धांधली चरम पर पहुंच जाती है।
वहीं, आबकारी विभाग और प्रशासन इस गंभीर गड़बड़ी से अनभिज्ञ बने हुए हैं या फिर जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि अतिरिक्त वसूली का पैसा दुकानदारों की जेब में जा रहा है।
क्या कहती है आबकारी नीति?
मौजूदा आबकारी नीति के अनुसार, कोई भी विक्रेता शराब को निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य पर नहीं बेच सकता। नियम का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण, भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
अब देखना यह है कि सरकार और संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर कब जागते हैं और दोषी दुकानदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।


