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शर्म नहीं, समझ चाहिए” – ग्राम करमेता की पनागर विधानसभा में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर बेटियों के सम्मान को मिला नया स्वर

 

लोकेशन जबलपुर

 

जब बात “मासिक धर्म” जैसे विषय की होती है, तो अक्सर चुप्पी छा जाती है। लेकिन आज ग्राम करमेता के पनागर की विधानसभा में हवाओं में एक नई सोच, एक नई शुरुआत की गूंज सुनाई दी।

ऋषि राघवेंद्र मानव कल्याण शिक्षा समिति व कंचन शिक्षा एवं महिला बाल विकास समिति व गंगोत्री एजुकेशन सोसाइटी एवं सफल समाज कल्याण एवं शिक्षा समिति जबलपुर (मध्य प्रदेश) द्वारा संचालित “हमारी किशोरी, हमारा आधार” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मासिक धर्म स्वच्छता दिवस का यह आयोजन न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति का बीज भी साबित हुआ।

इस अवसर पर ग्राम करमेता की 51 किशोरियों, महिलाओं एवं पुरुषों ने सक्रिय रूप से भाग लिया — यह संख्या मात्र नहीं, बल्कि बदलाव की प्रतीक बन गई।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों और समिति के सदस्यों द्वारा मासिक धर्म से जुड़े शारीरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सामाजिक मिथक और मानसिक दृष्टिकोण पर खुलकर संवाद किया गया। चर्चा संवेदनशील, ज्ञानवर्धक और उत्साहजनक रही — जिसमें किशोरियों ने बिना संकोच के अपने सवाल रखे।

समिति के पदाधिकारी संतोष जैन कोमल पटेल इंद्रजीत कोस्टा श्रीमती माया जैन श्रीमती भागवती कोस्टा कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए कहा

“मासिक धर्म कोई शर्म की बात नहीं, यह जीवन की शुरुआत है। आज जब गाँव की बेटियाँ एवं महिलाएं खुलकर सवाल पूछ रही हैं – तो यकीन होता है कि परिवर्तन संभव है।”

कार्यक्रम में समिति सदस्य श्रीमती माया जैन श्रीमतीनिषा सिंह सुनील मौर्य कंचन कोस्टा श्रीमती भागवती कोस्टा श्रीमती संगीता कोरी मोहित जैन विवेक मिश्रा अंकित श्रीवास्तव सहित अनेक ग्रामवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने सहयोग, संवेदनशीलता और सहभागिता से इस आयोजन को सफल बनाया।

हर प्रतिभागी किशोरी और महिला को निःशुल्क सेनेटरी पैड वितरित किए गए — क्योंकि जागरूकता तभी सार्थक होती है जब सुविधा, सहारा और सम्मान साथ चलें।

एक माँ की भावुक प्रतिक्रिया “पहली बार लगा कि मेरी बेटी के साथ कोई खड़ा है… अब उसे छुपकर नहीं जीना पड़ेगा।”

यह आयोजन न सिर्फ महिलाओं और किशोरियों के लिए शिक्षाप्रद रहा, बल्कि गाँव के पुरुषों को भी संवेदनशीलता, समर्थन और समावेशन का महत्व समझाने वाला एक महत्वपूर्ण सामाजिक अवसर बना।

आज ग्राम करमेता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब नीयत सच्ची हो और उद्देश्य स्पष्ट, तो बड़ा सामाजिक बदलाव भी गाँव की मिट्टी से जन्म ले सकता है।

कार्यक्रम की सफलता के लिए हम समिति के सभी सदस्यों, सहयोगी कार्यकर्ताओं एवं उदार दानदाताओं का हृदय से आभार प्रकट करते हैं, जिनकी संवेदनशीलता और सहभागिता ने इस प्रयास को संभव बनाया

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Author: aajtak24x7