आर. चंद्रा ब्यूरो
वक्ताओं ने उनकी ईमानदारी जन संघर्षों मैं की गई अगुवाई और आम जन में उनकी लोकप्रियता की सराहना की
औरैया। सार्वजनिक जीवन में सादगी, ईमानदारी, निस्पृह समाज सेवा, अपरिग्रही सदाचरण, से जन जन में लोकप्रियता के ख्यातिलब्ध रहे औरैया नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश दुबे को तीसरी पुण्य तिथि पर आज एक श्रद्धांजलि समारोह में पूरी श्रद्धा के साथ स्मरण किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय राजनीतिक महापुरुषों के जीवन मूल्यों को आत्मसात करके त्याग तपस्या और जन सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले धर्मेश जी के चित्र पर माल्यार्पण से समारोह का शुभारंभ हुआ। जिसकी अध्यक्षता श्री गोपाल सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष रमन पोरवाल ने की और संचालन वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुशवाहा ने किया।
इटावा से आए सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्तंभकार गणेश ज्ञानार्थी ने कहा कि आज के भौतिकता वादी युग में कोई व्यक्ति जीवन के पचपन वर्ष पूरी ईमानदारी से बिना किसी आय के साधन और बिना कमीशन, बिना दलाली के जन जन की सेवा में गुजार दे और अपने ऊपर कोई आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक अपराध का आरोप न लगने दे,ऐसा किसी व्यक्ति के लिए तभी संभव हो सकता है,जब उस पर ईश्वर की विशेष कृपा हो। बड़े बड़े राजनैतिक धुरंधरों और नौकरशाहों से अत्यंत आत्मीय संबंध रखने वाले धर्मेश जी आम लोगों के लिए लड़ते जूझते देखे जाते रहे। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री का भी विश्वस्त रहा कोई व्यक्ति इतना तपस्वी फक्कड़ भी हो सकता है,उन्हे देख कर कोई विश्वास नहीं कर सकता था।
संचालन कर रहे आनंद कुशवाह ने उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े ढेरों संस्मरण सुनाए और कहा कि उन जैसे विलक्षण विभूति का स्नेह संबंध जिनसे भी जुड़ा रहा वो खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उनके जीवन मूल्यों के संस्मरणों को स्थाई स्वरूप प्रदान करने के लिए एक स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा।
नेता जी सुभाष विचार मंच के संयोजक प्रवीण गुप्त ने दुबे जी के संस्मरणों से प्रेरक प्रसंग सुनाए और कहा कि वे समय के पाबंद और गरीब कमजोर लोगों के सच्चे हमदर्द थे।
इस अवसर पर सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शेखर मिश्रा, दिलीप तिवारी, दिलीप गुप्ता वरिष्ठ पत्रकार, श्रीराम गहोई, अरविंद बाजपेई, रामू पाठक, शहर कांग्रेस अध्यक्ष कृष्ण चंद्र गोयल, अशोक शर्मा, अशोक सिंह, राकेश चतुर्वेदी, राम लाल वर्मा, रामू गुप्ता, रवि लक्ष कार, हप्पा पाठक, रिशू शर्मा, प्रदीप दुबे ने भी श्री दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वर्गीय दुबे के पुत्र एडवोकेट ज्ञानेंद्र दुबे ने सभी अगंतुको के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि हम भाइयों की सबसे बड़ी पूंजी यही है कि हमारे यशस्वी पिता के सहयोग को लोग याद करते हैं और हम सब पर कृपा बनाएं रखते हैं। उनके पुत्र एडवोकेट सोमेंद्र एवं हेमेंद्र और पौत्र ने सभी शुभेक्षुओं का भावभीना स्वागत करके सबसे आशीष ग्रहण किया।



