ओंकारेश्वर।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि सप्ताहांत एवं अवकाश के दिनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
🔹 प्रशासन ने ओंकारेश्वर मंदिर की व्यवस्था में किया सुधार
जिला कलेक्टर ऋषभ गुप्ता एवं पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति के निर्देशन में मुख्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में व्यवस्थाओं को सुधारते हुए वीआईपी पास के नाम पर हो रही अव्यवस्थाओं पर नियंत्रण किया गया है। वर्तमान में श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत सुगमता से दर्शन सुलभ हो रहे हैं।
🔹 ममलेश्वर मंदिर में व्यवस्थाएं अब भी चिंताजनक
हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन स्थित ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। श्रद्धालुओं से ₹300 से ₹1000 तक लेकर 10 मिनट में विशेष प्रवेश का प्रलोभन दिया जा रहा है।
🔸 श्रद्धालु बोले: व्यवस्था हैरान करने वाली
लक्ष्मीकांत वर्मा (महाराष्ट्र) ने बताया:
> “हम बच्चों सहित दो घंटे लाइन में खड़े थे, तभी एक व्यक्ति ने ₹500 प्रति व्यक्ति में तत्काल दर्शन कराने की पेशकश की। अंततः पूरे परिवार को ₹1000 देकर दर्शन करवा दिए गए। यह देखकर हम हैरान रह गए।”
रमणीक पटेल (गुजरात) ने कहा:
> “ओंकारेश्वर में दर्शन अच्छे से हुए, लेकिन ममलेश्वर में वीआईपी कल्चर से निराशा हुई। हमने सामान्य लाइन से ही दर्शन किए क्योंकि अतिरिक्त राशि देना संभव नहीं था।”
🔹 प्रशासन का पक्ष
जब इस विषय में पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा:
> “मामला संज्ञान में आया है। क्या कोई कार्रवाई की जाएगी इस प्रश्न पर उनका कहना था कि आपको बता कर तो कार्रवाई नहीं की जायगी। ममलेश्वर मंदिर की व्यवस्था सुधारना हमारी प्राथमिकता है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।”
🔹 ट्रस्ट गठन की मांग एक बार फिर मुखर
ओंकारेश्वर विकास संघर्ष समिति लंबे समय से ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर मंदिरों के लिए एकीकृत ट्रस्ट के गठन की मांग कर रही है। समिति का कहना है कि यदि ओंकारेश्वर ममलेश्वर मंदिर का एक ट्रस्ट की ट्रस्ट गठित किया जाए तो व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और श्रद्धालु-केंद्रित हो सकती हैं।
🔸 अन्य शिकायतें भी उभरकर आईं
सूत्रों के अनुसार, भारतीय पुरातत्व विभाग के कुछ कर्मियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई गई है। साथ ही, जूता-चप्पल स्टैंड के नाम पर भी अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय नागरिकों में रोष है।
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🕊️ श्रद्धा के इस पावन स्थल पर यदि व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित न हो, तो जनविश्वास डगमगाता है। आवश्यकता है कि शासन, प्रशासन और संबंधित विभाग एकजुट होकर कार्य करें, ताकि ओंकारेश्वर की आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे और श्रद्धालुओं को सुगम व पवित्र अनुभव मिल सके।



