मुकेश। शुक्ला आज तक। 24 *7
ओंकारेश्वर
पावन नर्मदा नदी के तट पर स्थित ब्रह्मपुरी घाट पर इन दिनों श्रद्धालुओं को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर घाट से सभी चेंजिंग रूम हटाए जाने से महिलाओं को स्नान के बाद वस्त्र बदलने में असहजता हो रही है, वहीं दूसरी ओर घाट पर मौजूद प्रोफेशनल फोटोग्राफरों की गतिविधियाँ भी चिंता का विषय बन गई हैं।
ये फोटोग्राफर उन श्रद्धालुओं के स्नान करते समय फोटो खींचते हैं, जो उनसे फोटोशूट के लिए सहमति देते हैं, लेकिन इस दौरान वे गहरे पानी में उतरकर अन्य श्रद्धालुओं की गोपनीयता का भी अनजाने में उल्लंघन कर बैठते हैं। इससे विशेषकर महिलाएँ और पारिवारिक समूह असहज व असुरक्षित महसूस करते हैं।
श्रद्धालुओं और हिन्दू संगठनों की मांग –
घाट पर चेंजिंग रूम तत्काल पुनः स्थापित किए जाएं, खासकर महिलाओं के लिए।
फोटोग्राफरों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए, ताकि वे केवल घाट से दूर लोगों का फोटो लें जिनकी स्पष्ट सहमति हो।
फोटोशूट घाट पर स्नान करते समय न होकर, स्नान के बाद घाट से कुछ दूरी पर एक निर्धारित स्थान पर ही किया जाए।
घाट को ‘नो फोटोग्राफी ज़ोन’ घोषित किया जाए, जिसमें आम श्रद्धालुओं की प्राइवेसी को सुरक्षित रखा जा सके।
धार्मिक मर्यादा और श्रद्धा की रक्षा ज़रूरी –
हिन्दू सामाजिक संगठनों का कहना है कि ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थल किसी पर्यटन स्टूडियो के नहीं, बल्कि आस्था और साधना के स्थान हैं। यहाँ श्रद्धालु शांति, भक्ति और गोपनीयता के साथ स्नान व पूजन करना चाहते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह त्वरित कार्रवाई कर घाट की गौरव और गरिमा को बनाये रखे।



