मुकेश शुक्ला आज तक। 24 * 7 पुनासा क्षेत्र के दौरे पर आए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री भीम सिंह गुर्जर ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा करते हुए बतलाया कि
चीन के लिए तिब्बत और पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान दुखती हुई रग है । हमें उसपर नमक अवश्य लगाना चाहिए ।
विवाद वर्षों पुराना है। भारत की आजादी के बाद से ही हमने चीन को अपना दोस्त मान लिया था । भारत को उस समय संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थान मिल रहा था लेकिन हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत चीनी भाई-भाई का नारा देकर यह मौका चीन को दिया । आज हम स्थाई सदस्यता के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के कारण स्थाई सदस्यता मिली। उसके तुरंत बाद ही चीन ने तिब्बत पर 1951 में कब्जा कर लिया और वहां की बौद्धिक संस्कृति को बहुत चोट पहुंचाई और वहां की भौगोलिक स्थिति को भी बदल दिया गया है। दलाई लामा को भाग कर भारत में शरण लेना पड़ा।
हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इस पर भी कुछ नहीं कहा और चीन को तिब्बत हड़पने की मौन स्वीकृति प्रदान करदी। फिर भी चीन ने 1962 में भारत पर धोखे से आक्रमण कर दिया । भारत के आजादी के समय नेपाल नरेश ने नेपाल को भारत में विलय करने का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू के सामने रखा था।नेहरू जी ने उसे भी अस्वीकार कर दिया ।
बलूचिस्तान भारत में मिलना चाहता था । वह प्रस्ताव भी खारिज कर दिया। ऐसे बहुत से निर्णय तत्कालीन सरकारों ने लिये । जिससे देश को बहुत नुकसान हुआ । चीन ने एक पूरे राष्ट्र को जिसे तिब्बत कहते हैं । जो हमारे कश्मीर से लगाकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है । आज अगर तिब्बत देश होता तो भारत और चीन के बीच में कोई विवाद नहीं होता। कहा जाए तो चीन के साथ में भारत की कही से भी कोई सीमा नहीं मिलती है। लेकिन तिब्बत को अपने अधिकार में लेने के बाद उत्तर से उत्तर पूर्व तक पूरी सीमा आज चीन से मिलती है।
अरुणाचल के वर्तमान मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू जी ने एक साक्षात्कार में यह स्पष्ट कहा कि भारत के किसी भी प्रान्त की सीमा चीन से नहीं लगती । क्योंकि चीन और भारत के बीच में तिब्बत देश है। तिब्बत एक देश है। यह बात हमें हर बार और हर जगह निरंतर उठाना चाहिए।
चीन भारत के हर विकास के कार्यक्रमों में या पाकिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में या अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और भूटान में देश विरोधी हरकतें करता रहता है । नेपाल के सहारे भी हस्तक्षेप करता रहता है और हम उसके द्वारा एक देश को हड़प लिया गया उसका मुद्दा भी उठा नहीं पाते। आज भारत में सशक्त और मजबूत सरकार है । प्रधानमंत्री मोदी जी पर सभी को विश्वास है। पूरी दुनिया में उनका नाम है। हमको हर ऐसे स्थान पर जहां से पूरी दुनिया को आवाज सुनाई दे । वैसे हर फोरम पर हमें यह मुद्दा निरंतर उठाना चाहिए कि चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया है वह उसे आजाद करें और इसी प्रकार पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर कब्जा किया है वह भी उसे स्वतंत्र करें ।
बौद्ध धर्म के अनुसार तिब्बत में दलाई लामा को धार्मिक आधार पर चुना जाता है । दलाई लामा तिब्बत की निर्वासित सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करता है । दलाई लामा कोई व्यक्ति नहीं वरन् एक पद होता है । जैसे हमारे हिंदू धर्म में जगतगुरु शंकराचार्य की पदवी होती है । ईसाइयों में पोप जान पाल की पद भी होती है। इसी प्रकार बोधों में भी दलाई लामा तिब्बत के द्वारा निर्धारित किया जाता है। अब चीन चाहता है ,कि दलाई लामा चीन के द्वारा ही बनाया जाए। जिससे वह पूरी दुनिया में चीन का यह कहकर प्रचार किया जा सके , कि तिब्बत अब बहुत विकसित और विकास की ओर बढ़ रहा है। इसमें चीन लगातार परिश्रम कर रहा है। चीन चाहता है कि हमने जो तिब्बत पर कब्जा किया उसको सत्यापित करने के लिए दलाई लामा हमारा होना आवश्यक है।
भारत सरकार की ओर से दलाई लामा तिब्बत की जनता और दलाई लामा जी के द्वारा ही बनाया जाए यह कहा गया है। इसी प्रकार अरुणाचल के मुख्यमंत्री ने भी यह कहा है कि चीन से भारत की कोई सीमा नहीं मिलती है। बीच में तिब्बत देश बसा हुआ है। अब हम यह बात को कहने लगे हैं । यह बहुत अच्छा संदेश है। हमको हमारे दुश्मनों की दुखती हुई रग पर हाथ रख देना चाहिए। हमें जैसे को तैसा जवाब देना अब बहुत आवश्यक है। चीन को उसकी औकात बताने के लिए हमें तिब्बत का मुद्दा निरंतर हर जगह और संयुक्त राष्ट्र संघ में भी उठाना चाहिए। इसी प्रकार पाकिस्तान के लिए भी बलूचिस्तान एक दुखती हुई नब्ज है। हमें बलूचिस्तान के लिए भी खुलकर आवाज उठाना चाहिए। जो गलतियां हमने पहले कर चुके हैं । अब उसे सुधारने की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ी के लिए यह सुधार बहुत काम आएंगे। एक सरकार ने गलती की है और दूसरी सरकार ने उन गलतियों को ठीक करके देश को सशक्त और मजबूत किया । यह आने वाली पीढ़ी को इतिहास के द्वारा मालूम होगा। हमने इतिहास में गलत किया या हमारे निर्णय गलत हो चुके हैं । उन्हें ठीक करने का यह एक सुनहरा मौका है। आने वाली पीढ़ी को हम बहुत कुछ दे सकते हैं। बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इन समस्याओं से जूझना नहीं पड़े। इसके लिए हमें इस प्रकार के कड़े निर्णय अवश्य लेना होगा ।
इस सरकार से हम आशा करते हैं और यह सरकार ऐसे कड़े निर्णय लेने में सक्षम भी है। मेरी इस बात पर जो मैं कह रहा हूं चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में उस पर भी सरकार निर्णय लेगी। ऐसी आशा हम इस सरकार से और प्रधानमंत्री महोदय से रखते हैं। तिब्बत और बलूचिस्तान की आजादी भारत के लिए एक स्वर्णिम काल होगा । तब भारत अनंत वर्षों तक एक सशक्त और मजबूत राष्ट्र बना रहेगा।

