उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ अंशुल दुबे ने दिया व्याख्यान

आर. चंद्रा ब्यूरो चीफ

आचार्य शिव बालक द्विवेदी की सारस्वत साधना विषय पर व्याख्यान का आयोजन

याद किए गए आचार्य शिव बालक द्विवेदी

औरैया –उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन एवं शासकीय संस्कृत महाविद्यालय देवेन्द्रनगर पन्ना मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉo अंशुल दुबे असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत विभाग तिलक महाविद्यालय औरैया ने आचार्य शिव बालक द्विवेदी की सारस्वत साधना विषय को लेकर व्याख्यान दिया। 3 जुलाई 1948 को हरदोई जनपद में जन्मे आचार्य शिव बालक द्विवेदी ने डी ए वी कॉलेज में प्राध्यापक पद पर कार्य करने बाद दस वर्ष से अधिक समय बद्री विशाल कॉलेज फर्रुखाबाद के प्राचार्य पद को अलंकृत किया। उनके निर्देशन में कई शोध छात्रों ने पी एच डी की उपाधि प्राप्त की। आचार्य द्विवेदी का लेखन बहुविध और गंभीर था। उनके द्वारा रचित और संपादित ग्रंथों की संख्या 100 से अधिक है, जिनमें से 10 को राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। उनके द्वारा संस्कृत पत्रकारिता को एक नई दिशा प्रदान की गई। आचार्य द्वारा देश का पहला संस्कृत दैनिक नव प्रभातम् का प्रकाशन प्रारंभ किया। 75 से अधिक बार आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनका काव्यपाठ प्रकाशित हुआ। मृच्छकटिकम् जैसे धारावाहिक के लिए संस्कृत संवाद, गीत लेखन और भाषा विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया। विविध पुरस्कार जैसे नारद पुरस्कार उत्तर प्रदेश सरकार, कालिदास सम्मान, महर्षि वाल्मीकि सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान के साथ साथ वर्ष 2022 में पद्मश्री के लिए नामित भी किया गया। वे एक समृद्ध शिष्य परंपरा विरासत में छोड़ कर गए जो आज भी संस्कृत की ध्वज पताका फहराने में संलग्न है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉo नीरज शर्मा ने प्रमाण पत्र भेजकर डॉo अंशुल की प्रशंसा करते अमूल्य वैदुष्य पूर्ण व्याख्यान के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए बताया कि आचार्य हमारी धरोहर हैं अतः उनके मूल्यों, विचारों एवं कृतियों का संरक्षण किया जाना चाहिए । कार्यक्रम का लाइव प्रसारण संस्था के फेसबुक पेज और यू ट्यूब चैनल पर भी किया गया।

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Author: aajtak24x7

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