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मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7 महू / इंदौर
इंदौर से महू जाने वाला हाईवे केवल सफर का रास्ता नहीं, बल्कि खतरे की गली बन चुका है। लोकल बसों की लापरवाही के बाद अब निजी कार चालक भी बेलगाम हो चले हैं। हर दिन कोई न कोई हादसा, किसी न किसी को टक्कर मार कर फरार — और न कोई CCTV, न कोई ट्रैफिक जवान।
यह हैरान करने वाली बात है कि जहां सुरक्षा होनी चाहिए, वहां सिर्फ खामोशी है। पूरे रूट पर एक भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी तक खड़ा नज़र नहीं आता। लेकिन जैसे ही कहीं चालान काटने का मामला हो, वहीं अधिकारी सक्रियता दिखाने में पीछे नहीं रहते।
जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है — ये सवाल अब रोज़ के हादसों के बीच गुम होता जा रहा है।
इतना ही नहीं, आवारा पशुओं का आतंक भी इस हाईवे की एक और भयावह सच्चाई है।
सड़कों पर दिन-रात घूमते यह पशु न सिर्फ ट्रैफिक रोकते हैं, बल्कि कई गंभीर हादसों की वजह भी बनते है, ना इनके पालकों पर कोई कार्रवाई होती है, ना ही प्रशासन को इन्हें हटाने की कोई जल्दी दिखती है!
प्रशासन का ध्यान तभी सक्रिय होता है जब बात ‘चालान’ और ‘उगाही’ की होती है। लेकिन जब सड़क पर कोई तड़पता है, तो यही सिस्टम बहरा, अंधा और गूंगा बन जाता है।



