शहर के बीचों-बीच स्थित शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर 04 की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यह स्कूल जहाँ प्राथमिक स्तर की छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं, वहां भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें, छत से गिरते प्लास्टर, जंग खाए खंभे और सीलन भरे कमरों की स्थिति ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
जर्जर भवन, टूटती छतें
विद्यालय की छत जगह-जगह से झड़ रही है। बरसात के दिनों में सीलन और पानी भराव से क्लासरूम की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बच्चियां सिर पर किताबें रखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं ताकि प्लास्टर गिरने से खुद को बचा सकें। कई बार शिक्षक भी बाल-बाल बचे हैं।
शिक्षा के अधिकार पर संकट
जहां सरकार “पढ़े बेटी, बढ़े बेटी” का नारा दे रही है, वहीं यह विद्यालय उस वादे का मजाक बनाता प्रतीत हो रहा है। छात्राएं डरी-सहमीं क्लास अटेंड कर रही हैं, कई बच्चों के अभिभावक अब उन्हें स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्थानीय नागरिकों और स्कूल स्टाफ ने कई बार जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका और शिक्षा विभाग को लिखित में अवगत कराया, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। कोई भी अधिकारी मौके का निरीक्षण करने तक नहीं आया।
स्थानीय लोगों की मांग:
जल्द से जल्द भवन की मरम्मत या नया निर्माण हो।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
रिपोर्टर दिनेश केवट
अनुपपुर



