बालाघाट पुलिस की लापरवाहीः 8 वर्षीय मासूम की सड़क हादसे में मौत, समाज को जिम्मेदारी का सबक

लांजी 17 अगस्त 2025 सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही का खामियाजा अक्सर मासूमों को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला हादसा बालाघाट जिले के लांजी-बालाघाट मार्ग पर ग्राम भिमोड़ी में हुआ, जहां पुलिस की एफएसएल टीम के वाहन ने 8 वर्षीय बालक राजकुमार को टक्कर मार दी। इस घटना में बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जो न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ली, बल्कि पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराती है। क्या हम सभी सड़क पर चलते समय अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं?

घटना

घटना 17 अगस्त की शाम को घटी, जब ग्राम भिमोड़ी के निवासी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मना रहे थे। संध्या काल में करीब 5 से 6 बजे के बीच, ग्रामीण श्री कृष्ण की प्रतिमा का विसर्जन कर वापस लौट रहे थे। मासूम राजकुमार, पिता घनश्याम गरुड़े का बेटा, इस कार्यक्रम में शामिल था और विसर्जन के बाद सड़क किनारे घोटीघुसमारा मार्ग चौक के पास खड़ा था।

इसी दौरान लांजी की ओर से तेज गति से आ रहा बालाघाट पुलिस एफएसएल टीम का बोलेरो वाहन (क्रमांक MP 50 ZA 9919) बच्चे से टकरा गया। वाहन में प्रभारी महिला अधिकारी और टीम के सदस्य सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों, जिनमें सरपंच प्रतिनिधि पुरुषोत्तम अस्तने और अन्य ग्रामीण शामिल हैं, ने बताया कि चालक ने खतरनाक ढंग से वाहन चलाया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चा वाहन के बोनट से टकराकर करीब 10 फीट दूर जा गिरा।

स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाया और आपातकालीन सेवाओं – 100 डायल और 108 एम्बुलेंस को सूचित किया। लेकिन ये सेवाएं समय पर नहीं पहुंचीं। बच्चे की हालत बिगड़ती देख, बालाघाट की ओर से आ रहे वन विभाग के वाहन से उसे सिविल अस्पताल लांजी ले जाया गया। वहां डॉ. अंकित खरोले, डॉ. अक्षय उपराड़े और उनकी टीम ने 25 मिनट तक भरपूर प्रयास किए, लेकिन बच्चे के सिर और शरीर पर गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बच सकी।

पुलिस की लापरवाहीः एक बड़ा सवाल

यह हादसा बालाघाट पुलिस एफएसएल टीम की जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है। क्या कानून के रखवाले खुद नियमों की अनदेखी कर रहे हैं? तेज रफ्तार और लापरवाहीपूर्ण ड्राइविंग न केवल बच्चे की मौत का कारण बनी, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां बड़े हादसों को जन्म देती हैं। पुलिस विभाग से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि चालक और टीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

समाज को जिम्मेदारी का अहसासः सड़क सुरक्षा हम सभी की जवाबदेही

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। सड़क पर चलते समय हम सभी चाहे पुलिस हो, आम नागरिक हो या वाहन चालक अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। तेज गति, मोबाइल का इस्तेमाल या लापरवाही से ड्राइविंग से न केवल खुद की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि निर्दोषों की भी। क्या हम इंतजार करेंगे कि कोई और मासूम इसकी भेंट चढ़े?

चालकों की जिम्मेदारी: हमेशा गति सीमा का पालन

करें, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां बच्चे और पैदल यात्री अधिक होते हैं।

समाज की जिम्मेदारी: हादसे के समय तुरंत मदद करें,

लेकिन आपात सेवाओं की कमी पर भी ध्यान दें। क्या हम अपने इलाकों में बेहतर एम्बुलेंस सुविधाएं मांग सकते हैं?

सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी: ट्रैफिक नियमों का

सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। पुलिस वाहनों को भी आम वाहनों की तरह जवाबदेह बनाएं।

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Author: aajtak24x7

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