सिरोंज। नगर के गौरव वरिष्ठ चिकित्सक मध्यप्रदेश किरण फाउंडेशन के सचिव डॉ राकेश भार्गव का प्रदेशभर में सबसे अधिक नेत्रदान,अंकदान,देहदान को लेकर आईजा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट राजीव जैन सैनानी द्वारा अपनी टीम ने साथ डॉ राकेश भार्गव का सिरोंज आगमन पर भव्य स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर डॉ राकेश भार्गव ने अपने उद्धबोधन में कहा कि मेरे ही घर में मेरा सम्मान हो मुझे अच्छा नही लगता। लेकिन मेरी जन्मभूमि सिरोंज है और के क्षेत्रवासियो व मेरे शुभचिंतको की दुआओं से ही में पूरे मध्यप्रदेश में किरण फाउंडेशन के माध्यम से नेत्रदान,अंकदान,देहदान का कार्य सफलता पूर्ण कर रहा हूं। इसमें मुझे दुआओं के साथ ऐतेहासिक सफलता भी प्राप्त हुई है। लेकिन मेरे अनुभव से मुझे देखने में मिला है कि सबसे ज्यादा नेत्रदान,अंकदान,देहदान जैन समाज के लोगो द्वारा किया गया है। साथ ही में सिरोंज क्षेत्र व प्रदेश वासियों से अपील करता हूं कि नेत्रदान,अंकदान,देहदान के संबंध में अच्छा कार्य करें और आम नागरिको को प्रेरित करे व इस पवित्र कार्य में अपना योगदान दें। आज मेरा जो सम्मान आईजा के प्रदेश अध्यक्ष एड राजीव जैन सैनानी द्वारा किया गया वह स्मर्णय है और में उनका आभार व्यक्त करता हूं और हमेशा आईजा के सदस्यो द्वारा मेरे मिशन में मेरा सहयोग करते आए है। में सभी का आभारी हूं। इस मौके पर आईजा के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ राजीव जैन बंटी,सौरभ जैन गुलाबगंज,नरेन्द्र जैन,आशीष जैन आदि मौजूद रहें।
हमारी दुनिया व आत्मा की खिडकिया है आंखें – इस अवसर पर एडवोकेट राजीव जैन सैनानी ने कहा कि नेत्रदान में मृत्यु के बाद आँखों के कॉर्निया दान किए जाते हैं, जबकि अंगदान में हृदय, फेफड़े, यकृत, गुर्दे जैसे अंग दान किए जाते हैं। देहदान में मृत्यु के बाद पूरे शरीर को मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध के लिए दान किया जाता है। ये सभी दान व्यक्ति की मृत्यु के बाद दूसरों के जीवन को बचाने या बेहतर बनाने के लिए किए जाते हैं। जैसा कि शेक्सपियर ने कहा है कि आंखें वास्तव में हमारी दुनिया और हमारी आत्मा के लिए खिड़कियां हैं। सभी प्रकार के अंधेपन को ठीक करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन दृष्टिबाधित अधिकांश लोग सर्जरी और दवाओं की मदद से अपनी दृष्टि वापस पा सकते हैं। आज चिकित्सा विज्ञान उन रोगियों के लिए दृष्टि बहाल करने के लिए पर्याप्त रूप से उन्नत है जो दृष्टि दोष के कारण दिन-प्रतिदिन के जीवन से जूझ रहे हैं। लोग मृत्यु के बाद भी नेत्रदान कर दूसरों की मदद कर रहे हैं।
अपनी आँखें गिरवी रखना एक नेक कार्य – वही आईजा के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ राजीव जैन बंटी ने कहा कि आंखें तभी दान की जा सकती हैं जब डोनर को उनकी जरूरत न हो, यानी डोनर की मौत के बाद। हममें से जो लोग हमारी मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करना चाहते हैं, उन्हें जीवित रहते हुए उन्हें गिरवी रखने की जरूरत होती है। जब हम जीवित होते हैं, तो उन्हें स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है, ताकि रिसीवर हमारे बाद उनका अच्छी तरह से उपयोग कर सके। अपनी आँखें गिरवी रखना एक नेक कार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि आपके न रहने के बाद भी आपकी आंखें किसी और को दुनिया देखने में मदद करती रहेंगी। नेत्रदान शायद सबसे बड़ा दान है और यह पूरी तरह से स्वैच्छिक है। मृतक के नेत्रदान को परिजन किसी व्यक्ति के निकटतम जीवित रिश्तेदार द्वारा अधिकृत किया जाना चाहिए, भले ही मृतक ने जीवित रहते हुए अपनी आंख गिरवी रखी हो। यहां तक कि अगर उसने मृत्यु से पहले अपनी आंखें दान करने की प्रतिज्ञा नहीं की थी, तो परिजन भी मृतक की आंखें दान करने की अनुमति दे सकते हैं।
अंधे लोगों को दृष्टि का उपहार प्रदान करता है – इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी सौरभ जैन व नरेन्द्र जैन ने कहा कि परंपरागत रूप से प्रत्येक व्यक्ति जो नेत्रदान करता है वह दो अंधे लोगों को दृष्टि का उपहार प्रदान कर सकता है। कॉर्निया की कंपोनेंट सर्जरी के आने के साथ जिसमें एक विशिष्ट संकेत के लिए कॉर्निया की परत को ट्रांसप्लांट किया जाता है। इसका मतलब है कि अस्वस्थ परत को स्वस्थ परत से बदल दिया जाता है, जिससे सामान्य दृष्टि होती है। ऐसे में पांच मरीजों को एक आंख की रोशनी मिलती है। जब आप एक जोड़ी नेत्र दान करते हैं, तो आप दस दृष्टि-बचत कार्यों को सक्षम करते हैं। नेत्र बैंक को दान की गई सभी आंखों का उपयोग किया जाता है और उनके संबंध में एक रिकॉर्ड रखा जाता है।
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