*किसी भी युग में ब्राह्मणों का अपमान विनाशकारी साबित हुआ है – प्रेमभूषण जी महाराज
*जिला संवाददाता महेंद्र पाण्डेय*
सागर। ब्राह्मणों का आवेश करोड़ों कुलों का नाश कर देता है। इनका अपमान करने का परिणाम प्रतापी राजा प्रताप भानु ने देखा था। ब्राह्मणों का अपमान कभी भी नहीं होना चाहिए। रामजी भी वाल्मीकि मुनि से यही कहते हैं कि हमारे रहने से किसी साधु, संत, तपस्वी को क्लेश ना हो ऐसा स्थान बताइए जहां मैं जाकर रहूं। मनुष्य रूप में आए भगवान ने धरती पर ब्राह्मणों का इतना मान रखा तो आज भी इसका पालन अवश्य किया जाना चाहिए, इसी में हमारा और जगत का कल्याण है। उक्त बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के पांचवें सत्र में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहीं। कथा श्रवण हेतु आज म.प्र शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, अनेक विधायक, पूर्व विधायक, सहित विभिन्न जन प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ नेताओं का आगमन हुआ। कथा आयोजन में केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 6 फरवरी को तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल 5 फरवरी को शामिल होंगे।
सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह जी के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में भगवान की मंगल वन यात्रा के प्रसंगों का गायन करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने भगवान श्री राम को बताया है कि जिसके पांव अनायास ही तीर्थ यात्रा में पहुंच जाएं, आप उनके मन में निवास करते हैं। श्री राम जी की कथा त्याग की कथा है। अयोध्या जी में चक्रवर्ती जी के जाने के बाद केवल राज परिवार का ही नहीं बल्कि आम जनता में भी हम जो त्याग का भाव पाते हैं वह आज अनुकरण करने योग्य है। इस कथा में भरत चरित्र सुनने के बाद हमें भगवान का प्रेम प्राप्त करने का सूत्र मिलता है। और यह सूत्र है “रामहि केवल प्रेम पियारा।“
पूज्य पं प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि भरत भैया इस प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं जो सदा प्रभु श्रीराम के कहने में रहते हैं। यही कारण है कि बार-बार प्रभु श्रीराम लोगों को यह कहते हुए देखे जाते हैं कि आप हमें हमारे भरत भैया से भी ज्यादा प्रिय हो।मनुष्य सबसे अधिक प्रेम उसी को करता है जो व्यक्ति उसके कहने में रहता है। श्री राम कथा का श्रवण करने के समय अगर हम भरत जी के चरित्र का दर्शन करते हैं तो हमें पता चलता है कि सभी भाइयों में श्री राम जी भरत जी को सबसे ज्यादा प्यार करते हैं और उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम को जब भरत भैया के आगमन की सूचना मिलती है, तो वह इस बात को सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि भरत भैया तो हमेशा ही मेरे कहने में ही रहते हैं इसलिए उन्हें दूसरे ही पल अपनी समस्या का समाधान भी मिल जाता है। महाराज श्री ने कहा कि सामान्य जीवन में भी वह व्यक्ति धन्य है जिसके पास कहने में रहने वाला कोई व्यक्ति मौजूद है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में छीन झपट करके चाहे जितना कुछ भी इकट्ठा कर ले, लेकिन संसार की कोई वस्तु उसके साथ नहीं जाती। केवल परमार्थ, सत्कर्म और पुण्य ही साथ जाता है। परमार्थ यात्रा के पथिक की ही कीर्ति का गायन होता है। उन्होंने बताया कि प्रवचन करने से सिद्धि प्राप्त नहीं होती है। मन, कर्म और वचन से समर्पित भाव रखते हुए प्रयत्न करने से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। स्नेह बांटने से प्राप्त होता है। भगवान की भगवत्ता एक है, रूप अनेक हैं। वही राम हैं, वही कृष्ण हैं, वही शिव हैं वही भगवती हैं। भगवान के विभिन्न स्वरूप उनके भक्तों के कारण हैं। जैसे एक ही व्यक्ति किसी का पिता होता है किसी का पुत्र होता है किसी का मामा होता है किसी का साला होता है, किसी का जीजा भी होता है और किसी का फूफा होता है।
पूज्य महाराज श्री ने बताया कि इस कलयुग में राम जी के पक्षकार भी हैं और राम जी के विरोधी भी हैं। आश्चर्य तो इस बात से होता है कि अब रावण के समर्थक भी पैदा हो गए हैं। ने जो स्वार्थ के कारण राम जी का विरोध हो तो समझ में आता है लेकिन रावण की पूजा करने वालों की बात समझ में नहीं आती है। महाराज जी ने श्रीराम के वन में निवास और भ्रमण की कथा गाते हुए अनेक मोहक भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते और झूमते दिखाई दिए।
इस आयोजन के मुख्य यजमान भूपेंद्र सिंह जी ने सपरिवार व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी। रामायण जी की आरती में पूरा कथा पंडाल शामिल रहा। सभी श्रोताओं ने श्री हनुमान चालीसा पाठ में भी अपना स्वर मिलाया। आज भी अनेक संत महात्मा श्रीराम कथा श्रवण हेतु पहुंचे जिनमें ऋषिकेश से आए त्रिदंडी स्वामी श्रीमद् शक्ति प्रसाद शामिल रहे। जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सुरेंद्र जैन मालथौन के नेतृत्व में व्यासपीठ पर पहुंच कर पं प्रेमभूषण जी महाराज को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का चित्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। रूद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में नव प्राण प्रतिष्ठित दक्षिण मुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन हेतु आज भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मंदिर में ध्वज चढ़ाने अनेक ग्रामों से ग्रामवासी सोबतो, भजन मंडलियों के साथ दक्षिण मुखी हनुमान जी मंदिर पधारें।



