*जियावन पुलिस की सरपरस्ती में रेत माफियाओं का ‘पीला खेल’, रात के अंधेरे में छलनी हो रहा नदियों का सीन* (*आशुतोष चतुर्वेदी की रिपोर्ट सिंगरौली*)
देवसर (जियावन): जिले के जियावन थाना अंतर्गत इन दिनों रेत का अवैध कारोबार चरम पर है। हैरत की बात यह है कि यह पूरा खेल स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत और संरक्षण में फल-फूल रहा है। शासन के कड़े निर्देशों और एनजीटी (NGT) की पाबंदियों के बावजूद, जियावन क्षेत्र की नदियों से बेखौफ होकर रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है।
खाकी की चुप्पी, माफियाओं के हौसले बुलंद
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सूर्यास्त होते ही जियावन थाना क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर ट्रैक्टरों और डंपरों की कतारें लग जाती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध परिवहन में लगे इन वाहनों को पुलिस का ‘मूक समर्थन’ प्राप्त है। कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस द्वारा केवल ‘दिखावे’ की कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े माफिया आज भी कानून की पहुंच से बाहर हैं।
एंट्री के नाम पर ‘वसूली’ का खेल?
चर्चा है कि रेत लदे वाहनों से प्रति चक्कर ‘एंट्री फीस’ वसूली जा रही है। जियावन थाने के सामने से गुजरते हुए इन वाहनों पर कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो अवैध कारोबार पर लगाम लगाना नामुमकिन सा प्रतीत होता है।
पर्यावरण और राजस्व को भारी चपत
अवैध उत्खनन के कारण न केवल नदियों का जलस्तर गिर रहा है और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है, बल्कि शासन को भी हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। भारी वाहनों के कारण गांव की सड़कें भी जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आम जनता को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अब सवाल यह उठता है कि क्या सिंगरौली के उच्च अधिकारी जियावन पुलिस की इस कार्यशैली पर संज्ञान लेंगे? क्या पुलिस कप्तान (SP) उन दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे जो खाकी की आड़ में माफियाओं का साथ दे रहे है।



