लोकेशन/ सोनभद्र उत्तर प्रदेश
रिपोर्ट/ कन्हैयालाल केशरी
सोनभद्र: रेणुका नदी तट पर वृक्षारोपण में लाखों का खेल, मानकों की उड़ी धज्जियां
ओबरा/सोनभद्र।
प्रदेश सरकार जहां एक ओर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कर हरित अभियान को सफल बनाने का दावा कर रही है, वहीं जनपद के ओबरा क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। रेणुका नदी के तट पर स्थित पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं।
तकनीकी मानकों की अनदेखी, पौधों की ‘बलि’
स्थल पर वास्तविक स्थिति विभागीय दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। सूचना पट्ट पर 6112 ‘बोना नाली’ (गड्ढों) के निर्माण का दावा किया गया है, लेकिन मौके पर अधिकांश गड्ढे खाली पड़े मिले। जहां पौधे लगाए भी गए हैं, वहां वैज्ञानिक मानकों की खुली अनदेखी की गई है। नियमानुसार पौधों के बीच लगभग 5 मीटर की दूरी होनी चाहिए, लेकिन यहां 1 मीटर के भीतर ही 25-30 पौधे लगा दिए गए हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना बेहद कम है।
‘सघन वृक्षारोपण’ के नाम पर खानापूर्ति
विशेषज्ञों के अनुसार इतनी अधिक संख्या में एक ही स्थान पर पौधे रोपना उनके विकास में बाधक है और यह उनकी ‘हत्या’ के समान है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में वास्तविक कार्य करने के बजाय मजदूरी और संसाधनों की बचत के लिए एक ही जगह पौधे लगाकर लक्ष्य पूरा दिखा दिया गया।
सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था नदारद
नदी तट के कटाव को रोकने के लिए 1600 मीटर सुरक्षा खाई (CPT) बनाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन स्थल पर इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। सुरक्षा के अभाव में आवारा पशु पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा, न तो सिंचाई की समुचित व्यवस्था दिखाई दी और न ही खाद या कीटनाशक का उपयोग किया गया, जिससे पौधों के जीवित रहने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारों पर उठे सवाल
करोड़ों रुपये के बजट से संचालित इस परियोजना में लापरवाही और अनियमितताओं के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।



