फिरौती कांड में चार दोषियों को 3 साल की सजा।

फिरौती कांड में चार दोषियों को 3 साल की सजा

 

जातिसूचक गाली देकर मांगी थी 80 हजार की फिरौती, दो पर 21 हजार जुर्माना।

 

आज तक 24x7news सोनभद्र से विनोद कुमार की रिपोर्ट।

 

सोनभद्र। साढ़े 10 साल पुराने अपहरण और फिरौती के सनसनीखेज मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट गोविंद मोहन की अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने चारों दोषियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया। जुर्माना न देने पर दोषियों को 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।

मामला शाहगंज थाना क्षेत्र के आशाताली गांव का है। 13 नवंबर 2015 को पीड़ित दिनेश कुमार पुत्र प्रेम ने थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह अनुसूचित जाति से है और उसके पिता जमीन के क्रय-विक्रय का काम करते हैं। 11 नवंबर 2015 की शाम 8 बजे उसके पिता यह कहकर घर से निकले थे कि एक दिन बाद लौट आएंगे।

12 नवंबर को आरोपी बाला उर्फ शंकर सरन पुत्र रामनाथ हरिजन निवासी टेढ़ी ने किसी अन्य के मोबाइल से फोन कर दिनेश को बताया कि उसके पिता शक्तेशगढ़, मिर्जापुर में बंधक हैं। आरोपी ने दो मोबाइल नंबर देकर धमकाया कि बात नहीं की तो पिता को जान से मार देंगे। दिनेश ने जब अपने चाचा को जानकारी दी और उन्होंने फोन किया, तो आरोपियों ने जातिसूचक गालियां देते हुए 80 हजार रुपये फिरौती की मांग की। आरोपियों ने कहा कि बहुत दलाली का पैसा कमाया है, रकम नहीं पहुंचाई तो हत्या कर देंगे।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान बाला के साथ तीन अन्य आरोपियों के नाम सामने आए: जोखन हरिजन पुत्र जग्गू हरिजन निवासी टेढ़ा, थाना शाहगंज, धर्मेंद्र पटेल पुत्र हरिशंकर पटेल निवासी खैरटिया, थाना चुनार, और दिलीप कुमार पटेल पुत्र आशिक राम पटेल निवासी तेंदुआ, थाना चुनार, जिला मिर्जापुर।

पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद विवेचक ने चारों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।

न्यायालय ने दोषी बाला उर्फ शंकर सरन और जोखन हरिजन पर 16-16 हजार रुपये, जबकि धर्मेंद्र पटेल और दिलीप कुमार पटेल पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता सी. शशांक शेखर कात्यायन ने प्रभावी पैरवी की।

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Author: aajtak24x7

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