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तहसील से चंद कदम दूर 65 फीट शासकीय नाला पाटकर निर्माण, शिकायतों के बाद भी नहीं जागा राजस्व अमल
खसरा नंबर-97 राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय नाला दर्ज, दो पक्के निर्माण और एक जगह नाला भरने का आरोप, ग्रामीण बोले- संरक्षण के बिना संभव नहीं अतिक्रमण
ढीमरखेड़ा । तहसील कार्यालय और एसडीएम (राजस्व) कार्यालय से महज कुछ दूरी पर शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय नाला दर्ज खसरा नंबर-97 के करीब 65 फीट हिस्से को मिट्टी डालकर पाट दिया गया और उस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालयों के सामने यह सब होता रहा, लेकिन राजस्व अमले ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें लगातार की गईं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद हो गए। उनका आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता और राजस्व अमले की मिलीभगत के बिना शासकीय नाले पर इस तरह का निर्माण संभव नहीं है।
तीन जगह कब्जे का दावा, दो पक्के निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार शासकीय नाले की भूमि पर तीन स्थानों पर अतिक्रमण किया गया है। इनमें दो जगह पक्के निर्माण किए जा चुके हैं, जबकि तीसरे स्थान पर पुलिया डालकर नाले को मिट्टी से भर दिया गया और उसे समतल कर निर्माण की तैयारी कर ली गई। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शासकीय भूमि पर स्थायी कब्जा होने के साथ-साथ प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय नाला, फिर कैसे हुआ निर्माण
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक खसरा नंबर-97 शासकीय नाला दर्ज है। नियमानुसार इस भूमि पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद वर्षों से बरसाती पानी की निकासी वाले इस नाले में अब मिट्टी, गिट्टी, सीमेंट और निर्माण सामग्री दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान यह अतिक्रमण पूरे क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि निर्माण कार्य कई दिनों तक चलता रहा, लेकिन राजस्व विभाग का अमला आखिर आंखें मूंदे क्यों बैठा रहा। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती है तो इससे अतिक्रमणकारियों का मनोबल बढ़ता है और सरकारी जमीनों पर कब्जे का सिलसिला जारी रहता है।
पटवारी की भूमिका भी घेरे में
मामले में हल्का पटवारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में ढीमरखेड़ा क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के कई मामले सामने आए, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यदि राजस्व अमला समय पर कार्रवाई करता तो शासकीय नाले पर कब्जे की नौबत ही नहीं आती।



