सत्ता का ‘सुरक्षा कवच’ या अफसरों का ‘अंधा कानून’? परागढ़ में खेतों में बरस रहे पत्थर, फिर भी हुक्मरान ‘बेखबर’!

जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी

समाचार

 

सत्ता का ‘सुरक्षा कवच’ या अफसरों का ‘अंधा कानून’? परागढ़ में खेतों में बरस रहे पत्थर, फिर भी हुक्मरान ‘बेखबर’

 

“बारिश में पानी नहीं, साहब! क्रेशर वाले पत्थरों की बारिश कर रहे हैं”… परागढ़ में दिन-रात हो रही भारी ब्लास्टिंग से उड़े ग्रामीणों के होश, अफसरों की ‘गांधारी’ वाली पट्टी पर उठे सवाल।

शिवपुरी/करैरा। जब रसूख का नशा सिर चढ़कर बोलता है, तो कानून के हाथ लंबे नहीं बल्कि बंधे हुए नजर आते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है करैरा अनुभाग के ग्राम परागढ़ में, जहाँ एक स्टोन क्रेशर पर दिन-रात हो रही हैवी ब्लास्टिंग ने किसानों का जीना मुहाल कर दिया है।

हालत यह है कि किसान खेत में फसल उगाने के लिए पसीना बहाते हैं और ऊपर से क्रेशर की ब्लास्टिंग से बड़े-बड़े पत्थर आकर उनकी मेहनत को पल भर में रौंद देते हैं। सौ-सौ मीटर दूर खेतों तक उड़कर आ रहे पत्थरों से उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील हो रही है।

धमाके से हिल रही ज़मीन, धूल से घुट रहीं साँसें

ग्रामीणों का दर्द केवल फसलों की बर्बादी तक सीमित नहीं है:

खेतों में पत्थरों की ‘ओला वृष्टि’: ब्लास्टिंग के पत्थरों के कारण खेतों में ट्रैक्टर तक चलाना दूभर हो गया है।

कांप रहे कच्चे कुएं: भारी धमाकों के कंपन से खेतों के कच्चे कुएं धंस रहे हैं, जिससे सिंचाई का एकमात्र जरिया भी खत्म हो रहा है।

साँसों पर संकट: उड़ती धूल की मोटी परत न सिर्फ फसलों की ग्रोथ रोक रही है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों की आँखों में जलन और साँस की बीमारियों का सबब बन गई है।

शिकायतों का ‘कचरा’ और रसूखदार पर ‘मेहरबानी’

ग्रामीण अमर सिंह लोधी का सीधा आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर, करैरा एसडीएम से लेकर स्थानीय विधायक तक हर चौखट पर गुहार लगाई, लेकिन राजनीतिक रसूख के आगे सब नतमस्तक हैं।

“शिकायतें रद्दी के टोकरे में फेंक दी जाती हैं क्योंकि क्रेशर मालिक की पहुँच ‘ऊपर’ तक है। प्रशासन चुप्पी साधे तमाशा देख रहा है।”

— अमर सिंह लोधी (पीड़ित ग्रामीण)

 

वहीं दूसरी ओर, जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का प्रशासनिक अंदाज भी देख लीजिए। खनिज अधिकारी रामसिंह उइके का वही रटा-रटाया बयान सामने आया है:

“मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, पता करवाता हूँ। नियम विरुद्ध मिला तो कार्रवाई करेंगे।”

— रामसिंह उइके (खनिज अधिकारी)

 

बड़ा सवाल यह है कि: जब सैकड़ों बीघा जमीन तबाह हो गई और ग्रामीण आंदोलित हैं, तब भी अगर यह मामला खनिज अधिकारी के “संज्ञान” में नहीं है, तो आखिर अफसर कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं या जानबूझकर आँखें मूँद रखी हैं?

 

ग्रामीणों का अल्टीमेटम: “आर-पार की होगी लड़ाई”

किसान कामता प्रसाद, राय सिंह, प्रकाश और रामनिवास लोधी सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस जानलेवा ब्लास्टिंग पर रोक नहीं लगाई गई और क्रेशर को आबादी से दूर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

 

मुख्य माँगें:

आबादी और कृषि भूमि के बीच जारी खतरनाक ब्लास्टिंग पर तुरंत रोक।

नियमानुसार स्टोन क्रेशर को दूर शिफ्ट किया जाए।

राजस्व विभाग द्वारा फसलों, कुओं और जमीनों के नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए।

 

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