*गुरुपूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब,*
*वर्ष 2030 तक सफेद मार्बल से चमकेगा श्री धूनीवाले दादाजी का दरबार*
मिश्रीलाल कोहरे
*खंडवा*
निमाड़ के खंडवा में प्रसिद्ध श्री धूनीवाले दादाजी मंदिर* का कायाकल्प अब आकार लेने लगा है। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच मंदिर निर्माण समिति ने नए मंदिर और पूरे 23 एकड़ आश्रम परिसर के विकास की विस्तृत योजना साझा की। लक्ष्य है कि दादा धूनीवाले के समाधिस्थ के100 वर्ष पूरे होने पर 2030 तक* मंदिर का भव्य निर्माण पूर्ण कर लिया जाए
*करीब100 करोड़ की लागत, से 4 चरणों में बनेगा मंदिर*
मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक है। निर्माण 4 चरणों में होगा और इसमें लगभग 1.30 लाख घनफुट सफेद मार्बल* का उपयोग किया जाएगा। मंदिर की नींव खुद चुकी है और गुरुपूर्णिमा से पहले मार्बल के नमूने भी मंदिर पहुंच गए हैं। निर्माण की डिजाइन अयोध्या और अक्षरधाम मंदिर के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट वीरेंद्र त्रिवेदी* तैयार कर रहे हैं।
शुरुआत में इसे सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने की योजना थी, लेकिन दान पर आधारित निर्माण, विशेष डिजाइन और इतनी बड़ी मात्रा में मार्बल जुटाने में समय लगने के कारण अब अंतिम तिथि *2030* तय की गई है। निर्माण कार्य मंदिर ट्रस्ट की बजाय एक *विशेष समिति* की निगरानी में होगा, जिसमें सभी पक्षों को शामिल किया गया है।
*भगवा से सफेद में बदलेगा स्वरूप*
वर्तमान में मंदिर सीमेंट-कांक्रीट से बना है और दीवारों-गुंबदों पर भगवा रंग है, जो वर्षों से दादा दरबार की पहचान रहा है। नया मंदिर पूरे *सफेद मार्बल* से बनेगा, जिससे इसे अधिक दिव्य और आकर्षक स्वरूप मिलेगा। निर्माण समिति ने राजस्थान की कई मार्बल खदानों का निरीक्षण कर गुणवत्ता और कीमतों का आकलन भी कर लिया है।
*23 एकड़ आश्रम का भी होगा विकास*
मंदिर के साथ-साथ पूरे 23 एकड़ आश्रम परिसर* का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। परिसर में मंदिर, भक्त निवास, गोशाला, बगीचा, ट्रस्ट कार्यालय और प्रसादालय शामिल हैं। समिति का दावा है कि सिंहस्थ के आसपास* गोशाला, भक्त निवास और अन्य सुविधाओं को नया रूप दे दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि नए मंदिर की मांग वर्षों से थी। *1990 में* छोटे सरकार के समर्थकों ने 84 खंभों वाले मंदिर के लिए मार्बल भी मंगवाया था, लेकिन उस समय ट्रस्ट और समर्थकों के बीच विवाद के कारण काम शुरू नहीं हो सका था। अब 6 साल पुराने विवाद के बाद सभी के सहयोग से निर्माण शुरू हो चुका है।
30 जून 2025* को मंदिर का भूमिपूजन हो चुका है। समिति को उम्मीद है कि दादाजी के भक्तों के सहयोग से 2030 तक यह मंदिर आस्था का एक नया केंद्र बनेगा


