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मासूमों की जान पर खतरा! जर्जर छत से गिरा प्लास्टर, खुले पड़े सरिए
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बारिश में टपकती छत, नीचे पढ़ते बच्चे; प्लास्टिक की पाल बनी सहारा,
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स्कूल है या हादसे का इंतजार? टूटे भवन और खुली छत से बढ़ा खतरा,
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छत का प्लास्टर उखड़ा, सरिए आए बाहर; फिर भी बच्चों की पढ़ाई जारी,
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टूटी बाउंड्रीवाल से जर्जर छत तक बदहाल स्कूल, कब जागेगा शिक्षा विभाग?
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शासकीय माध्यमिक विद्यालय लेहखु में जर्जर भवन की हालत अब बेहद चिंताजनक हो गई है। स्कूल की छत का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर चुका है और कई हिस्सों में छत के सरिए साफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे खतरनाक हिस्सों के नीचे ही बच्चे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
वर्ष 2005-06 में निर्मित विद्यालय में 31 बालक और 20 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। बारिश के दौरान स्कूल के चारों कमरों की छत से पानी टपकता है। पानी से बचाव के लिए दो भवनों की छत पर प्लास्टिक की पाल बिछाई गई है, लेकिन यह अस्थायी इंतजाम भवन की जर्जर हालत को नहीं छिपा पा रहा है।
छत से प्लास्टर गिरने और सरिए खुले होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि प्लास्टर का कोई भारी हिस्सा बच्चों के ऊपर गिरा तो गंभीर स्थिति बन सकती है। इसके अलावा स्कूल की बाउंड्रीवाल भी क्षतिग्रस्त है, जिससे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिभावकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल स्कूल भवन का तकनीकी निरीक्षण कराने और खतरनाक हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि विभाग पहले ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
सेगांव से दीपक गुप्ता



