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मुंगावली मंडी में लापरवाही का ‘ट्रिपल अटैक’!

।🔴 मुंगावली मंडी में लापरवाही का ‘ट्रिपल अटैक’

 

15 माह से 560.40 क्विंटल सोयाबीन का सत्यापन लंबित, फरवरी से टीन शेड खाली नहीं—B से C ग्रेड में पहुंची मंडी, फिर भी जिम्मेदारी तय नहीं

 

मुंगावली। कृषि उपज मंडी समिति मुंगावली की कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक ही मंडी में व्यापारी के 560.40 क्विंटल सोयाबीन से जुड़े रिकॉर्ड का करीब 15 माह से पोर्टल पर सत्यापन लंबित, फरवरी से टीन शेड/सेट खाली नहीं कराए जाने और मंडी का B ग्रेड से C ग्रेड में पहुंच जाने जैसे मामले सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होने से अब मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

 

560.40 क्विंटल माल पोर्टल पर ‘कम’, नुकसान व्यापारी का

 

दस्तावेजों में करीब 560.40 क्विंटल सोयाबीन से संबंधित तीन अनुज्ञा पत्रों का मामला सामने आया है। आरोप है कि लंबे समय से इनका पोर्टल पर सत्यापन नहीं किया गया। नतीजा यह कि पोर्टल पर व्यापारी का स्टॉक कम दिखाई दे रहा है।

 

सवाल सीधा है—जब अनुज्ञा पत्र मंडी रिकॉर्ड में मौजूद हैं तो उनका सत्यापन 15 माह तक क्यों नहीं हुआ?

 

क्या मंडी सचिव ने इतने लंबे समय में पोर्टल की जांच ही नहीं की?

क्या रिकॉर्ड की जानकारी सचिव के संज्ञान में नहीं आई?

या फिर किसी कारण से सत्यापन जानबूझकर लंबित रखा गया?

 

अगर सत्यापन के बाद व्यापारी का वास्तविक स्टॉक पोर्टल पर दर्ज हो सकता है, तो 15 माह की देरी से व्यापारी को हुए संभावित आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

फरवरी से टीन शेड खाली नहीं—आखिर किसकी ‘मेहरबानी’?

 

दूसरा मामला मंडी परिसर के टीन शेड/सेट से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि फरवरी से अब तक सेट खाली नहीं कराए गए हैं।

 

इस मामले में शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंच चुकी हैं और ग्वालियर स्तर से मंडी का निरीक्षण भी किया जा चुका है। इसके बावजूद यदि आज तक शेड खाली नहीं हुए तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निरीक्षण के बाद दिए गए निर्देशों का क्या हुआ?

 

क्या संबंधित व्यापारियों को शेड खाली करने के नोटिस दिए गए?

क्या निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है?

क्या मंडी को नियमानुसार किराया प्राप्त हो रहा है?

किराए की रसीद और आवंटन का रिकॉर्ड क्या है?

और यदि कब्जा/उपयोग नियमों के विपरीत है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 

सबसे बड़ा सवाल—आखिर किसके संरक्षण में सेट इतने लंबे समय से खाली नहीं कराए जा रहे हैं?

 

B ग्रेड से C ग्रेड—मंडी की गिरती स्थिति की जिम्मेदारी किसकी?

 

मुंगावली मंडी पहले B ग्रेड में थी, लेकिन अब C ग्रेड में पहुंच गई है। मंडी की ग्रेडिंग में यह गिरावट भी गंभीर जांच का विषय है।

 

मंडी की आवक, व्यापार, राजस्व और अन्य संबंधित मानकों की स्थिति क्या रही?

क्या मंडी में आने वाला कृषि माल कम हुआ?

क्या व्यापार दूसरी मंडियों की ओर चला गया?

क्या मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली का इसका कोई प्रभाव पड़ा?

और यदि मंडी की स्थिति खराब हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब क्यों नहीं मांगा गया?

 

शिकायत पर शिकायत, निरीक्षण पर निरीक्षण—फिर कार्रवाई कहां?

 

मंडी से संबंधित शिकायतें MD स्तर तक पहुंचने, उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने और मामलों के सामने आने के बाद भी यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अब केवल जांच ही नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।

 

मंडी सचिव के दायित्व में आने वाले पोर्टल संबंधी कार्यों में इतनी लंबी देरी कैसे हुई?

 

क्या मंडी सचिव ने 15 माह तक पोर्टल नहीं देखा?

क्या संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा नहीं की गई?

क्या व्यापारी की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया?

या फिर कोई ऐसी प्रशासनिक मजबूरी थी जिसके कारण मामला लंबित रखा गया?

 

यदि गलती हुई थी तो उसे समय रहते सुधारना किसकी जिम्मेदारी थी?

 

मंडी बोर्ड के सामने अब सीधे सवाल

 

मंडी बोर्ड बताए—

 

1. 560.40 क्विंटल सोयाबीन से जुड़े अनुज्ञा पत्रों का सत्यापन 15 माह तक क्यों लंबित रहा?

 

 

2. पोर्टल पर वास्तविक स्टॉक अपडेट नहीं होने से व्यापारी को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है?

 

 

3. फरवरी से टीन शेड/सेट खाली क्यों नहीं कराए गए?

 

 

4. इन सेटों से कितना किराया वसूला गया और किस अवधि का रिकॉर्ड है?

 

 

5. ग्वालियर टीम के निरीक्षण के बाद क्या निर्देश दिए गए और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 

 

6. B ग्रेड से C ग्रेड में मुंगावली मंडी क्यों पहुंची?

 

 

7. मंडी की ग्रेडिंग गिरने के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी कौन हैं?

 

 

8. लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

 

 

अब सवाल सचिव से ज्यादा व्यवस्था पर

 

मामला केवल एक व्यापारी के 560.40 क्विंटल सोयाबीन या कुछ टीन शेडों तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि यदि मंडी सचिव अपने दायित्व वाले रिकॉर्ड का समय पर सत्यापन नहीं करते, मंडी परिसर के सेट खाली नहीं करवा पाते और मंडी की ग्रेडिंग लगातार गिरती है, तो फिर मंडी बोर्ड की निगरानी व्यवस्था आखिर किस लिए है?

 

क्या कार्रवाई के लिए किसी और बड़े नुकसान का इंतजार किया जा रहा है?

 

अब जरूरत है कि मंडी बोर्ड के MD स्तर से पूरे मामले की रिकॉर्ड आधारित जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय और दोष मिलने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।

 

— सौरभ जैन

जिला ब्यूरो, Aaj Tak 24×7

अशोकनगर

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Author: aajtak24x7