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संघर्षों की राह से अदालत तक पहुँचे आदिल खान*

रिपोर्ट

शमसुलहक खान

आज तक 24 X 7 न्यूज़ ब्यूरो बस्ती

 

 

 

*संघर्षों की राह से अदालत तक पहुँचे आदिल खान

 

कभी बुद्ध विहार में गुजारी रातें, कभी दोस्तों के घर महीनों रहे—दोस्तों और उनके परिवारों के सहयोग से पूरा हुआ अधिवक्ता बनने का सपना

 

बस्ती। बहादुरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत पूरापिरई में जन्मे आदिल खान ने आर्थिक कठिनाइयों और तमाम चुनौतियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए अधिवक्ता बनने का मुकाम हासिल किया है। उनका उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण हो गया है।

 

वर्ष 1995 में जन्मे आदिल खान ने वर्ष 2005 तक कसौरा बाजार स्थित मकतब(मदरसा )से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद फैजाबाद (वर्तमान अयोध्या) स्थित राजकीय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा वर्ष 2014 में पूरी की।

 

इंटरमीडिएट के बाद आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण करीब दो वर्ष तक पढ़ाई स्थगित हो गई। इसके बाद रोजगार के सिलसिले में विदेश(सऊदी )गए और लगभग दो वर्ष वहां रहे। वापस लौटने के बाद कागजात की कमी के चलते करीब एक वर्ष तक उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं ले सके। बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर एलएलबी (hons) की पढ़ाई पूरी की।

 

*जब पढ़ाई के लिए छत भी संघर्ष से मिलती थी*

 

आदिल खान की पढ़ाई की कहानी केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही। कई बार पढ़ाई और परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए उन्हें सेंटर जाना पड़ता था, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी होती थी कि रास्ते के किराये तक के पैसे उपलब्ध नहीं होते थे।

 

ऐसे मुश्किल वक्त में उनके दोस्त व दोस्त के परिवार उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। कभी उन्हें बुद्ध विहार में रुकना पड़ा, तो कभी महीनों तक दोस्तों के घर पर रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। दोस्तों के परिवारों ने भी उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह अपनाया और दिल खोलकर सहयोग किया।

 

कई बार सेंटर तक पहुंचने के लिए पैसे नहीं होते थे तो दोस्तों ने किराये के लिए आर्थिक मदद की। कभी किसी दोस्त ने अपनी गाड़ी से सेंटर तक पहुंचाया। इन छोटे-छोटे सहयोगों ने उनके बड़े सपने को टूटने नहीं दिया।

 

आदिल खान कहते हैं कि उनकी सफलता में केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि उन दोस्तों और उनके परिवारों की दुआएं, सहयोग और भरोसा भी शामिल है, जिन्होंने मुश्किल दौर में उनका साथ नहीं छोड़ा।

 

विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2025 में प्रथम प्रयास में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन AIBEXX उत्तीर्ण किया। अब उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण के साथ उनके अधिवक्ता बनने का सपना पूरा हुआ है।

 

*संघर्ष से निकला संकल्प*

 

आदिल खान का कहना है कि जीवन में कई बार ऐसा दौर आया जब लगा कि परिस्थितियां पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर कर देंगी, लेकिन हर मुश्किल के बीच किसी न किसी का सहयोग उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

 

“आज जब मैं अधिवक्ता के रूप में खड़ा हूं तो मुझे अपनी मेहनत के साथ उन तमाम दोस्तों और उनके परिवारों का चेहरा याद आता है, जिन्होंने मेरे कठिन समय में मेरा हाथ थामा। किसी ने रहने की जगह दी, किसी ने रास्ते का खर्च दिया, तो किसी ने अपनी गाड़ी से मुझे सेंटर तक पहुंचाया। और उन सभी को जिन्होंने मेरे लिए दुआ की मैं उनके सहयोग को जिंदगी भर नहीं भूल सकता।”

 

आदिल खान का कहना है कि अब वह कानून के माध्यम से समाज के जरूरतमंद और वंचित लोगों की आवाज बनने तथा उन्हें उनके अधिकारों और न्याय की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने का प्रयास करेंगे।

 

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी रास्ते को कठिन जरूर बना सकती है, लेकिन मजबूत इरादा, निरंतर मेहनत और अच्छे लोगों का साथ मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बना देता है।

अंत में उन्होंने कहा मैं हमेश शोषित, वंचित, और समाज में जो परिवार हाशिए पर है उनका हमेशा सहयोग करूंगा।

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Author: aajtak24x7