राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज के निर्देशन में देश भर के जीर्णशीर्ण जैन तीर्थ स्थलो को का होगा उद्वार – हार्दिक हुंडिया

सिरोंज। ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने कहा कि देश के राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज से मैनें पत्रकारो के महासम्मेलन में जो आर्शीवाद प्राप्त किया। तभी से मेरे जीवन में एक नया परिवर्तन आया फिर मैने सोचा कि जैन समाज के तीर्थ क्षेत्रो जो कि जीर्ण शीर्ण स्थिति में है वह दिगम्बर व स्वातम्बर पंतो की लडाई में भगवान का अनादर हो रहा है। अब यह लडाई समाप्त कर एकता के साथ भगवान को उच्च शिखर पर पहुचाकर पुनः मंदिरो का निर्माण करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होने कहा कि अंतरिक्ष जी पार्श्व नाथ दादा के तीर्थ की महिमा अपरंपार है। तीर्थ के बारे में बहुत सुना था। सब से पहले तो दुख की बात बता दु की यहाँ भाई भाई के बीच का झगड़ा बहुत दुख जा रहा है। झगड़ा करने वाले भी जैन हम कैसे भगवान के अनुआई है। ’हार्दिक हुंडिया की दो हाथ जोड़ के बिनती है की ओ पार्श्व नाथ दादा के भक्तों,आप चाहे श्वेतांबर हो या दिगंबर लेकिन अपने आप को पूछो की क्या धर्म हमने शिखा दादा की भव्य प्रतिमा, भाई भाई के बीच मनमुटाव के कारण आज ये प्रतिमा एक पुराने मंदिर की एक गुफा में बिराजमान है। औलोकिक प्रतिमा देखकर आप की नजरे दादा की तरफ़ से नहीं हटेगी। दादा के दर्शन करने क्या बच्चे,क्या बुड्ढे,क्या युवा लाइन लगती है। दादा का बहुत ही पुराना मंदिर दादा के दर्शन करना इतना सरल नहीं है जितना हम दूसरी जगह आराम से दादा के दर्शन कर सकते है एक दम छोटी बारी से आप को प्रवेश करना है। मेरे जैसा जैसे ही ये बारी में प्रवेश करने के लिये झुका तो वही गिर गया, मेरी धर्म पत्नी और दो दादा के भक्तों ने खड़ा किया। यदि आप तबीयत से थोड़े भी लाचार हो तो परिवार का कोई ना कोई सदस्य साथ में होना बहुत जरूरी है। दादा एक गुफा में विराजमान है। दादा के दर्शन करने जैसे ही छोटी बारी से प्रवेश करने के बाद एक सीडी से नीचे उतरना पड़ता है,सिर्फ़ एक भाविक ही उतर सकता है। फिर दादा के दर्शन होते है। हम जब धर्मशाला से दादा के दर्शन करने जाते है, तब दादा,दादा,दादा करते जाते है और दादा की भव्य,मन मोहक, औलोकिक प्रतिमा दिखते ही सिर्फ मन के अनमोल भाव से दादा ही दिखते है,दादा बहुत ही छोटी जगह और इतने बड़े दादा ऐसी जगह पर बिराजमान देखते ही दुख हुआ। दादा शंखेश्वर पार्श्वनाथ दादा की तरह इनका भी भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। लेकिन यहाँ तो सिर्फ़ भगवान पार्श्वनाथ दादा की बात करने वाले भगवान के नाम भक्तों के बीच लड़ाई हार्दिक हुंडिया ने दोनों संप्रदाय के भक्तों से बिनती की है कि मेरे भगवान , मेरे भगवान करते हो तो भगवान को वहाँ बिठाओ जहाँ भगवान का अनमोल स्थान हो श्वेताम्बर हो या दिगम्बर, हम भाई भाई की लड़ाई में कभी दोनों पक्षों ने सोचा है की हम क्या कर रहे है यदि ये मंदिर पर चाहे किसी का भी हक्क हो वो चाहे श्वेतांबर हो दिगम्बर जिनका हो। उनको उनका हक्क मिलना चाहिये। वहाँ लड़ाई के भाई भाई के बीच के किस्से देखकर,सुनकर बहुत दुख होता है तब हार्दिक हुंडिया का दादा के भक्तों से सवाल है की हमने क्या धर्म शिखा और क्या समजा है। परमात्मा की यात्रा करने आने वाले भक्तों ख़ुद की सब तकलीफ़ भूल जाते है, हाथ में सहारा के लिए लकड़ी ले के जाना मंज़ूर है लेकिन कैसी भी परिस्थिति हो दादा के दर्शन या पूजा तो करना ही करना है चाहे कितना भी समय लगे ऐसे अनमोल भाव वाले भक्तों को देखकर मन खुश होता है। सतत ऐसी में बैठने वाले वहाँ दादा की आंगी या पूजा की बोलिया बोलकर चढ़ावा लेने वाले दादा के भक्तों दादा के पास गुफा में बिना ऐसी, बिना पंखा घंटों तक बैठते है, ये है हम सभी की दादा के प्रति अपार श्रद्धा है। हार्दिक हुंडिया की अंतरिक्ष पार्श्वनाथ दादा के भक्तों से बिनती है कि ’आओ हम सभी मिलकर हमारे दादा पार्श्वनाथ दादा एक है तो हम सब एक होकर दादा के भव्य मंदिर का निर्माण करे। कई सालों से जो दादा भव्य मंदिर में विराजमान होने चाहिये वो दादा आज कहा बैठे है जरा सोचो समजो और अंतरिक्षजी तीर्थ की एकता के लिए, दादा के मंदिर के भव्य निर्माण के लिए, भाई भाई यानी श्वेताम्बर या दिगम्बर भाई ओ की एकता के लिये जो भी हम से कार्य होता है वो हम सभी करे। यदि हम दादा के भक्त है तो किसी भी संप्रदाय के खिलाफ कोई भी ऐसा शब्द ना बोले की किसी को भी दुख हो आखिर हम दादा पार्श्वनाथ दादा के सभी भक्तों है तो दादा का भव्य मंदिर जल्द से जल्द निर्माण हो ये ही मेरी उच्च भावनाओ है।

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Author: aajtak24x7

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