
आज तक 24 * 7 के लिए मुकेश शुक्ला की खास रिपोर्ट
खंडवा ओंकारेश्वर पवित्र तीर्थ नगरी एवं मां नर्मदा का पवित्र गोमुख घाट से देवउठनी ग्यारस आरंभ होने के पहले ही हजारों की संख्या में साधु संत एवं पैदल परिक्रमा वासी यात्रा पर निकल चुके हैं ओंकारेश्वर के नर्मदा किनारो से लेकर खरगोन जिले तक अनेक जगहों पर साधु संत महंत परिक्रमा वासियों को पैदल चलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है मगर इस दिशा में शासन प्रशासन के द्वारा मार्ग सुधार को लेकर कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है जिसको लेकर संपूर्ण क्षेत्र में विरोध के स्वर भी उभरने लगे हैं
नर्मदा नदी संपूर्ण विश्व की एक मात्र ऐसी नदी हैं जिसकी पैदल चलकर परिक्रमा की जाती हैं। श्रद्धालु इसे शिव पुत्री देवी के रूप में पूजते हुए आ रहे हैं और महामाई की आरती आराधना भी धूमधाम से की जाती हैं। वैसे तो वर्षा क।ल के चार महा छोड़कर देवउठनी ग्यारस से लेकर देव सैनी ग्यारस तक पूरे देश विदेश से नर्मदा परिक्रमा पर श्रद्धालु आस्था पूर्वक निकलते हैं दीपावली के आसपास ठंड के दिनों में यह संख्या और बढ़ जाती हैं प्रतिदिन हजारों लोग पैदल,बस से,मोटर साइकिल आदि से परिक्रमा करते हैं। नर्मदा की पूरी पैदल परिक्रमा लगभग 3600 किलोमीटर की होती हैं जिसे पूरा करने में तीन से चार महीने तक लग जाते हैं। नर्मदा पुराण के अनुसार वास्तविक नर्मदा जी की परिक्रमा यात्रा 3 साल 3 महीने 13 दिन में शास्त्रों युक्त पूर्ण होती है ओंकारेश्वर से देवउठनी ग्यारस 5 नवंबर से राजस्थान के श्री महंत श्री दाता गुरु जो नर्मदा नदी के ओंकारेश्वर के निकट बिलोरा बुजुर्ग ग्राम में चातुर्मास कर रहे हैं अपने भक्तों के साथ परिक्रमा आरंभ करेंगे तो वही नर्मदा जी के परम सेवा के निराहार उपासक पर्यावरण देसी श्री श्री दादा गुरु जी 5 नवंबर से अपनी चौथी पैदल परिक्रमा यात्रा आरंभ करेंगे ऐसे में नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच जावेगी संपूर्ण मार्ग अत्यधिक खराब होने के कारण शासन प्रशासन की लापरवाही से साधु संत महंत एवं परिक्रमा वासियों का पैदल चलने का सफर कठिनाइयां भरा होगा मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर श्री महंत महंत साधु संत महात्माओं के साथ ही अनेक पारिवारिक लोग भी महिला पुरुषों एवं बच्चों के साथ मां नर्मदा का गुणगान भजन करते हुए नर्मदे हर नर्मदे हर महामंत्र का जाप करते हैं यह यात्रा वैसे तो लगभग 4 महीने में अनेक श्रद्धालु पूर्ण कर लेते हैं संपूर्ण परिक्रमा पथ पर इन मां नर्मदा भक्तों का विभिन्न आश्रमों सहित धर्मशालाओं में ग्रामीणों द्वारा परिक्रमा यात्रियों के लिए विश्राम और भोजन की व्यवस्थाएं भी की जाती है नर्मदा परिक्रमा यात्रा पथ पर कई समाजसेवियों और श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा वासियों के लिए भोजन आवास आदि की व्यवस्थाएं जुटाई जाती हैं। मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर से आरंभ होकर यह पवित्र यात्रा रत्न। सागर स्थित गुजरात राज्य में नर्मदा समुद्र मैं विलय स्थल को चलित नौ को औ के माध्यम से पार करते हुए वापस मध्यप्रदेश में नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक होकर ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर में मां नर्मदा को जल समर्पित किए जाने के बाद संपन्न होती है ।



