श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तृतीय वर्षगांठ पर बड़नगर तहसील में प्रभात फेरियों का ऐतिहासिक महासंगम

श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तृतीय वर्षगांठ पर बड़नगर तहसील में प्रभात फेरियों का ऐतिहासिक महासंग

अयोध्या श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तृतीय वर्षगांठ के पावन अवसर पर बड़नगर तहसील द्वारा संपूर्ण तहसील क्षेत्र की प्रभात फेरियों का भव्य महा संगम आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में बड़नगर तहसील के विभिन्न ग्रामों, नगरों एवं मंडलों से सैकड़ों की संख्या में रामभक्तों ने सहभागिता कर धर्म और भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

सुबह प्रातःकाल से ही प्रभात फेरियों का आगमन प्रारंभ हो गया। भगवा ध्वज, श्रीराम के जयघोष, ढोल-नगाड़ों और भजनों की मधुर धुनों से पूरा क्षेत्र राममय हो गया। प्रभात फेरी में बालक-बालिकाएं, युवा, महिलाएं एवं बुजुर्ग सभी उत्साहपूर्वक शामिल हुए और “जय श्री राम” के नारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर बालाजी खरसोद कला की प्रभात फेरी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। खरसोद कला से आए रामभक्तों ने पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन करते हुए नृत्य किया, जिससे श्रद्धालुओं में ही नहीं बल्कि मार्ग में खड़े नागरिकों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तगण श्रीराम की भक्ति में लीन होकर झूमते-नाचते नजर आए।

प्रभात फेरी मार्ग में विभिन्न मंडलों, सामाजिक संगठनों एवं रामभक्त परिवारों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा कर, तिलक लगाकर, पुष्पमालाएं पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। कई स्थानों पर शीतल जल, फल एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आयोजन के दौरान भोजन प्रसाद की उत्तम एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था भी की गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्थाओं की सराहना सभी उपस्थित भक्तों द्वारा की गई।

कार्यक्रम के दौरान महिला मंडल की बहनों ने श्रीराम भजनों पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं बच्चों ने भी प्रभु श्रीराम की धुन पर भक्ति गीतों के साथ उत्साह दिखाया। पूरा वातावरण धार्मिक उल्लास, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

यह महा संगम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने वाला आयोजन भी सिद्ध हुआ। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ी में सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता की भावना को और अधिक सशक्त करते हैं।

 

बडनगर से संजय आचार्य

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Author: aajtak24x7

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