लोकेशन \ सोनभद्र उत्तर प्रदेश
रिपोर्ट \ कन्हैयालाल केशरी
ओबरा ताप विद्युत परियोजना में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 77वाँ गणतंत्र दिवस
ओबरा (सोनभद्र)।
ओबरा ताप विद्युत परियोजना, ओबरा के संकुल स्थित गांधी मैदान में 77वाँ गणतंत्र दिवस भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए उत्साह एवं हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया।
मुख्य महाप्रबंधक ने किया ध्वजारोहण
इस अवसर पर ओबरा ताप विद्युत गृह के मुख्य महाप्रबंधक इं० आर० के० अग्रवाल ने प्रातः 08:30 बजे ध्वजारोहण किया तथा उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
संविधान के मूल मूल्यों पर दिया गया बल
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में लोकतंत्र, समता, पंथनिरपेक्षता एवं विधि के शासन को सर्वोच्च महत्व दिया गया है तथा समाजवादी व्यवस्था की स्थापना हेतु योजनाबद्ध विकास पर बल दिया गया है। यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसके साथ ही भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
ऊर्जा संरक्षण एवं सतत विकास पर जोर
मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें तथा उन्हें सुरक्षित रखें। हमारा लक्ष्य न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सस्ती, सुलभ एवं स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि ओबरा तापीय परियोजना ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश को श्रेष्ठ सेवाएँ प्रदान कर रही है, विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है।
पर्यावरणीय चुनौतियों पर जागरूकता
वर्तमान समय की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन एवं वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता बताई और कहा कि तापीय परियोजनाओं के संचालन के दौरान पर्यावरण संरक्षण हेतु सकारात्मक एवं ठोस कदम उठाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
ओबरा ‘बी’, ‘सी’ एवं ‘डी’ परियोजनाओं की प्रगति
उन्होंने बताया कि ओबरा तापीय परियोजना विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सदैव अग्रणी रही है।
ओबरा ‘बी’ परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता की पाँचों इकाइयाँ काफी पुरानी होने के बावजूद अधिकारी एवं कर्मचारी सस्ती एवं अधिकतम विद्युत उत्पादन हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। वर्ष 1977 से परिचालनरत भारत की प्रथम 200 मेगावाट क्षमता की इकाई संख्या-11 सहित वर्तमान में ओबरा ‘बी’ की सभी इकाइयाँ पूर्ण क्षमता के साथ निर्बाध विद्युत उत्पादन कर रही हैं। वर्ष 2025 में इन इकाइयों का विद्युत उत्पादन पूर्व वर्षों की तुलना में बेहतर रहा है।
ओबरा ‘सी’ परियोजना (2×660 मेगावाट) का निर्माण कार्य 22 दिसंबर 2016 को प्रारंभ हुआ, जो कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियों में भी निरंतर चलता रहा। वर्तमान में इसकी दोनों इकाइयाँ पूर्ण क्षमता पर संचालित हैं तथा कुल 2320 मेगावाट विद्युत उत्पादन के साथ ओबरा परियोजना देश की अग्रणी विद्युत उत्पादन इकाइयों में सम्मिलित है।
इसके अतिरिक्त 800 मेगावाट की दो इकाइयों वाली ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना का कार्य प्रारंभिक चरण में है। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगी, बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को भी संतुलित करेगी। इस परियोजना की सफलता हेतु स्थानीय जनसमर्थन, जनभागीदारी, प्रशासनिक सहयोग एवं सामाजिक समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
विद्यार्थियों की ऐतिहासिक सहभागिता
इस वर्ष समारोह में विभिन्न विद्यालयों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही, जिससे आयोजन और भी भव्य, अनुशासित एवं गरिमामय बन सका। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
समारोह में मुख्य अभियंता इं० एस० एन० मिश्रा, इं० एस० के० सिंघल, इं० दिवाकर स्वरूप,
सीआईएसएफ कमांडेंट श्री एस० के० सिंह,
अधीक्षण अभियंता इं० मणि शंकर राय, इं० डी० के० सिंह, इं० अब्दुल निशात, इं० सुधांशु यादव, इं० बिनोद पाण्डेय, इं० अजय उपाध्याय, इं० चंद्रमा प्रसाद,
उप महाप्रबंधक (लेखा) श्री अखिलेश त्रिपाठी,
सीएमओ डॉ० पी० के० सिंह,
अधिशासी अभियंता इं० सदानंद यादव सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन अनुराग मिश्रा जी द्वारा किया गया


