Skip to main content

Aaj Tak24x7

एनडीपीएस एक्ट के विविध प्रावधान एवं क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला*

*एनडीपीएस एक्ट के विविध प्रावधान एवं क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला

 

*एनडीपीएस एक्ट के अपराधों में विवेचना का स्तर उत्कृष्ट करने के लिये ग्वालियर जिले के पुलिस अधिकारियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला*

 

ग्वालियर। 02.02.2026। आज पुलिस कन्ट्रोल रूम सभागार ग्वालियर में *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह(भापुसे)* के मार्गदर्शन में ग्वालियर जिले के पुलिस अधिकारियों के लिये ‘‘एनडीपीएस एक्ट के विविध प्रावधान एवं क्रियान्वयन में चुनौतियॉ व समाधान’’ विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी *अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पश्चिम/अपराध) श्रीमती सुमन गुर्जर* की उपस्थिति में इस कार्यशाला में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स से प्रशिक्षण देने आये *असिस्टेंट कमिश्नर डी.एस.सिंह(आईआरएस), एडीपीओ श्री मुरारी लाल गुप्ता व एडीपीओ अमोल सिंह तोमर* के द्वारा ग्वालियर जिले के लगभग एक सैकड़ा विवेचना अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट की विवेचना की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर कार्यशाला में सूबेदार आयुष मिश्रा, सूबेदार सोनम पाराशर सहित ग्वालियर जिले के थानों से आए विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।

 

सर्वप्रथम *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह(भापुसे)* एवं *अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पश्चिम/अपराध) श्रीमती सुमन गुर्जर* द्वारा प्रशिक्षण देने आये उपस्थित अतिथियों को पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया। उसके बाद अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पश्चिम/अपराध) द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट के विविध प्रावधान एवं क्रियान्वयन में चुनौतियॉ व समाधान हेतु आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की रूपरेखा से अवगत कराया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि एनडीपीएस एक्ट अत्यंत संवेदनशील एवं तकनीकी कानून है, जिसमें विवेचना की छोटी-सी त्रुटि भी मामलों को न्यायालय में कमजोर कर देती है। ऐसे में विवेचना अधिकारियों का विधिक प्रावधानों की बारीक समझ होना अत्यंत आवश्यक है। इसी संबंध में यह दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसका अधिक से अधिक लाभ लें।

 

*वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह(भापुसे)* ने अपने उद्बोधन में कहा कि नशा समाज और युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। एनडीपीएस एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से ही नशा तस्करों पर कठोर प्रहार संभव है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों की पेशेवर दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ विवेचना की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करते हैं। इस दो दिवसीय कार्यशाला से आपको फील्ड लेवल पर जो परेशानी आती है निश्चित की आपको उसका समाधान मिलेगा और मुझे विश्वास है कि भविष्य में एन.डी.पी.एस. की विवेचना में दोष सिद्धियों में बेहतर परिणाम आयेंगे।

 

प्रशिक्षण कार्यशाला में *सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के असिस्टेंट कमिश्नर डी.एस.सिंह* द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों से कहा कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में तकनीकी शुद्धता ही सफलता की कुंजी है। कानून का सही अनुपालन, दस्तावेजीकरण और प्रक्रियात्मक अनुशासन से ही दोषसिद्धि की दर को बढ़ाया जा सकता है। उन्होने पुलिस अधिकारियों को बताया कि एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की विवेचना काफी गंभीरता से करनी चाहिए क्योंकि कभी-कभी विवेचक द्वारा की गई एक छोटी सी चूक के कारण आरोपी न्यायालय से बरी हो जाता है। इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत आने वाले सेक्शन का सम्पूर्ण ज्ञान होना चाहिये तभी आप एनडीपीएस प्रकरण की विवेचना करते समय उसका स्तर उच्च रखकर आरोपी को सजा दिला पायेंगे। प्रशिक्षण में उन्होने एनडीपीएस एक्ट में धारा 50 पर गहनता से चर्चा की साथ ही जब्त किए गए माल की चेन ऑफ कस्टडी को बिना किसी त्रुटि के बनाए रखने के संबंध में बताया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेश किए गए साक्ष्य विश्वसनीय और प्रभावित हैं। थानों में उपलब्ध कराई गई ड्रग डिटेक्शन किट के सही उपयोग और जब्त किए गए पदार्थों की समय पर फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया एवं थानों के मालखानों में बड़ी मात्रा में जमा मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उनका निपटारा ट्रायल के दौरान ही जल्द से जल्द किया जाना चाहिए उसके संबंध में भी बताया गया।

 

प्रशिक्षण कार्यशाला के द्धितीय सत्र में *एडीपीओ श्री मुरारी लाल गुप्ता व एडीपीओ अमोल सिंह तोमर* द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों को बताया कि जब भी आप एनडीपीएस में सीजर करते है तब आप ड्रग्स की पहचान ड्रग डिटेक्शन किट का उपयोग करके किस प्रकार कर सकते है। उन्होने उपस्थित पुलिस अधिकारियो को एनडीपीएस एक्ट की सभी धाराओं पर किस प्रकार प्रभावी कार्यवाही की जावे इस पर दिशा-निर्देश के अनुरूप कार्यवाही की प्रक्रिया को स्पष्ट किया और एनडीपीएस की विवेचना में मैदानी स्तर पर होने वाली परेशानियों से अवगत कराते हुए प्रक्रिया का पालन किस प्रकार किया जावे इस विषय पर एन.डी.पी.एस. एक्ट की धाराओं की विस्तृत व्याख्या करते हुए की जाने वाली कार्यवाही के संबंध में समाधान किया।

aajtak24x7
Author: aajtak24x7

यह भी पढ़ें

*प्रेस विज्ञप्ति* *नई दिल्ली* *15 सितंबर 2026* *केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संत मलूकदास जी की स्मृति में स्मारक डाक टिकट का किया विमोचन* *संत मलूकदास जी की स्मृति में जारी स्मारक डाक टिकट उनकी भक्ति, सेवा और मानवता के संदेश को राष्ट्रीय स्मृति से जोड़ने का प्रयास: ज्योतिरादित्य सिंधिया* *रामभक्ति को मानवता और लोककल्याण से जोड़ने वाली संत परंपरा भारत की आत्मा है* नई दिल्ली। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संत मलूकदास जी की स्मृति में आयोजित संत समागम के अवसर पर उनके सम्मान में भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। इस अवसर पर श्री राम कथा एवं संत समागम का भी शुभारंभ हुआ। संत मलूकदास जी की स्मृति में जारी यह डाक टिकट उनकी भक्ति, ज्ञान, करुणा और लोककल्याण की उस समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय स्मृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसने पीढ़ियों को जीवन का मार्ग दिखाया है। इस अवसर पर संत-महात्माओं, पूज्य संत शिरोमणियों, पूज्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज, श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास के पदाधिकारियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि संतों की वाणी और उनका जीवन भारत की आत्मा को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह विशेष संयोग है कि जिस संत का हृदय प्रभु श्रीराम की भक्ति में रमा रहा, उनकी स्मृति में स्मारक डाक टिकट का विमोचन श्रीराम कथा के शुभारंभ के अवसर पर हो रहा है। *संत मलूकदास जी की रामभक्ति में समाहित था मानवता का संदेश* सिंधिया ने कहा कि संत मलूकदास जी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे, लेकिन उनकी रामभक्ति केवल पूजा और उपासना तक सीमित नहीं थी। उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरित्र को अपने जीवन का दर्शन बनाया और उसे जन-जन तक पहुंचाया। श्रीराम को उन्होंने कर्तव्य, त्याग, सत्य, करुणा, न्याय और लोककल्याण के प्रतीक के रूप में देखा। उन्होंने संत मलूकदास जी की प्रसिद्ध पंक्तियों, *“मलूका ऐसी राम की, कृपा भई है मोय। सकल जगत अपना भया, बैरी रहा न कोय॥”* का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पंक्तियों में संत की उस आध्यात्मिक अवस्था का दर्शन होता है, जहां राम की कृपा से अपना और पराया का भेद समाप्त हो जाता है और पूरा संसार अपना लगने लगता है। उन्होंने कहा कि राम की कृपा जब होती है तो परिवार बड़ा होता जाता है, हृदय में वैर समाप्त होता है और सेवा ही साधना बन जाती है। *विरासत और विकास के साथ आगे बढ़ रहा नया भारत* केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि गहरा सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा देश की अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पुनर्जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए विकास और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत आधुनिक भी हो सकता है और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ भी। तकनीक में अग्रणी बनने के साथ अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखना ही भारत की विशिष्ट पहचान है। *संत मलूकदास जी का संदेश विकसित भारत की मानवीय आधारशिला* सिंधिया ने कहा कि भारत विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास तभी पूर्ण होगा जब उसके केंद्र में मनुष्य होगा। देश की प्रगति में करुणा, अर्थव्यवस्था में अवसर, तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता, शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण और समाज के कल्याण के लिए शक्ति का उपयोग ही विकास को सार्थक बनाता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि डाक विभाग द्वारा जारी किया गया यह स्मारक डाक टिकट संत मलूकदास जी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाने का माध्यम है। यह आने वाली पीढ़ियों को उनकी भक्ति, ज्ञान, करुणा और मानवता के संदेश से जोड़ने का भी कार्य करेगा।

टॉप स्टोरीज

मौसम का हाल

मौसम डेटा स्रोत: https://weatherlabs.in