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बीएएसएफ कंपनी की रोबस्टा किस्म के करेले की फसल से किसान बेहद परेशान, 20–30 गांवों में भारी नुकसान

संदीप पाटीदार खरगोन

 

बीएएसएफ कंपनी की रोबस्टा किस्म के करेले की फसल से किसान बेहद परेशान, 20–30 गांवों में भारी नुकसा

धरगांव (नि.पि.)—

क्षेत्र में बीएएसएफ कंपनी की रोबस्टा किस्म के करेले की खेती किसानों के लिए गंभीर संकट बन गई है। इस किस्म को बड़े भरोसे और उम्मीदों के साथ लगाने वाले किसान आज भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। तीन महीने की कड़ी मेहनत, कीटनाशक, खाद, सिंचाई व मजदूरी पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी किसानों को न तो लागत निकल रही है और न ही बाजार योग्य उत्पादन मिल पा रहा है।

धरगांव निवासी किसान भगवान पाटीदार ने बताया कि उन्होंने बीएएसएफ कंपनी की रोबस्टा किस्म का करेला लगभग तीन माह पूर्व लगाया था। फसल पर अब तक लगातार दवाइयों व खाद का प्रयोग किया गया, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन बेहद निराशाजनक रहा। किसान के अनुसार फसल में करेले छोटे आकार में ही पीले पड़ जाते हैं और पूरी तरह विकसित होने से पहले ही टूटकर नीचे गिर जाते हैं, जिससे खेतों में भारी नुकसान हो रहा है।

भगवान पाटीदार ने बताया कि उन्होंने तीन बीघा भूमि में करेले की खेती की थी, जिसमें बीज, खाद, दवाइयों, ड्रिप, सिंचाई व मजदूरी सहित लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये की लागत आई है। इसके बावजूद अभी तक वे अपनी लागत का एक बड़ा हिस्सा भी नहीं निकाल पाए हैं। किसान का कहना है कि यदि रोबस्टा किस्म अच्छा उत्पादन देती तो एक बीघा से करीब 3 लाख रुपये तक का मुनाफा संभव था, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती, लेकिन वर्तमान स्थिति में किसान पूरी तरह घाटे में चला गया है।

किसानों का आरोप है कि इसी क्षेत्र में अन्य कंपनियों की करेले की किस्मों से किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा प्राप्त हुआ है, इसी कारण इस किस्म को लगाने वाले सभी किसान स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

धरगांव, सुलगांव, नंदरा, करौंदिया, मोगावा, झापड़ी, छोटी खरगोन, इटावदी सहित करीब 20 से 30 गांवों के किसान इस किस्म की फसल से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई किसानों की आजीविका पूरी तरह इसी फसल पर निर्भर थी, लेकिन फसल खराब होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

प्रभावित किसानों ने एकजुट होकर बीएएसएफ कंपनी से उचित मुआवजे की मांग की है। साथ ही किसानों ने इस संबंध में खरगोन कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई है और प्रशासन से फसल की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ही उन्हें राहत नहीं मिली तो वे आगे चलकर आंदोलनात्मक कदम उठाने को भी मजबूर होंगे। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन, कृषि विभाग और संबंधित कंपनी पर टिकी हुई हैं कि किसानों को कब तक न्याय और राहत मिल पाती है।

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Author: aajtak24x7