महाशिवरात्री पर रेघड़ा शिव मंदिर भव्य मेले का नजारा , उमड़ी विभिन्न क्षेत्रों से हजारों दर्शनार्थियों क भीड़ ।
आज तक 24x7news सोनभद्र से विनोद कुमार की रिपोर्ट।
विन्ढमगंज सोनभद्र। विकास खंड दुद्धी अंर्तगत घिवही रेघड़ा शिव मंदिर एनएच 39 पर स्थित है। जो महाशिवरात्री की पावन अवसर पर यहां हर वर्ष एक भव्य मेले का आयेजन किया जाता है, जिसमे विभिन्न क्षेत्रों से इस मेले में दुकानदार व लोगों की भीड़ देखी जाती है , जो इस वर्ष भी देखने को मिला।15/02/2026 रविवार को महाशिवरात्री पर भव्य मेले का आयोजन किया गया जिसमे विभिन्न क्षेत्रों से हजारों दर्शनार्थियों की भीड़ देखी गई।बताया जाता है कि यहां की शिव मंदिर की ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु श्रद्धाभाव से मन्नत मांगते हैं उनकी कामना अवश्य पुरी होती है। महाशिवरात्री पर यहां लोग मिट्टी के घोड़े भांग धतूरा व ध्वजा की चढ़ावा चढ़ाते हैं,और श्रद्धालु भक्त कथाएं भी सुनते हैं। आपको बता दें कि यह रेघड़ा शिव मंदिर सैकड़ों वर्ष से यहां स्थापित है, जो नगर उंटारी झारखंड राज्य के राजा भैया साहब के द्वारा स्थापना किया गया है। बताया जाता है कि 1885 ईस्वी में राजा भवानी सिंह की पत्नी शिवमानी कुंवर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण दर्शन देकर कहा कि शिव पहाड़ी पर उनकी प्रतीमा राजाओं द्वारा छुपा कर रखा गया है, जिन्हें साथ लेजाकर अपने राज्य में स्थापित करने की बात कही जो शिव पहाड़ी सोनभद्र ग्राम महुआरिया के कनहर नदी तट पर स्थित है। उसी समय हाथी की सवारी से भगवान श्रीकृष्ण की प्रतीमा को लेजाते वक्त हाथी इसी स्थान पर आ कर बैठ गया था। जो रानी शिवमानी कुंवर की शिव मंदिर स्थापना करने की मन्नत से हाथी आगे बढ़ा था इसी प्रकार मार्ग में जहां-जहां हाथी बैठा वहां-वहां मंदिरों की स्थापना की गई। बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रतीमा 32 मन यानी (1280) किलो ग्राम तक है जो शुद्ध सोने से बनी है, जो झारखंड राज्य के गढ़वा जिला,नगर उंटारी में श्री कृष्ण और राधा रानी की मंदिर बाबा बंशीधर के नाम से विख्यात है, तब से लेकर आज तक स्थापित प्रथम रेघड़ा शिव मंदिर पर हर वर्ष महाशिवरात्री की पावन अवसर पर मेला लगाने का प्रथा चली आ रही है। जहां हजारों श्रद्धालु भक्त यहां मन्नत की भेंट चढ़ाते हैं और कथा सुनते हैं।



