लोकेशन कन्नौद
संवाददाता गणेश जायसवाल
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आगामी वर्ष 2026 का प्रथम चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि तदनुसार 3 मार्च 2026 मंगलवार को घटित होगा
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह खगोलीय घटना पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र एवं सिंह राशि के अंतर्गत संचरित होगी। भारतवर्ष में यह ग्रहण ग्रस्तोदय स्वरूप में परिलक्षित होगा, जिसका अर्थ है कि चंद्र देव का उदय ग्रहण की अवस्था में ही होगा। इस ग्रहण का सूतक काल प्रातः 6:20 बजे से ही प्रभावी हो जाएगा। ग्रहण का प्रारंभ अपराहन् 3:20 बजे नियत है तथा इसका मोक्ष (समाप्ति) सायं 6:47 बजे होगा। भारत के अतिरिक्त इसका दृश्य क्षेत्र पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा प्रशांत महासागरीय क्षेत्र रहेंगे। ग्रह-नक्षत्रों की इस युति का विभिन्न राशियों पर पृथक-पृथक प्रभाव दृष्टिगोचर होगा। मेष राशि हेतु यह मानसिक व्याधि, वृषभ हेतु सुखद अनुभूति, मिथुन हेतु अर्थ लाभ तथा कर्क राशि के जातकों के लिए शत्रु भय का कारक बनेगा। सिंह राशि के जातकों के लिए यह कष्टकारी सिद्ध हो सकता है, अतः उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी। कन्या राशि में अशांति एवं तुला में लाभ के योग हैं। जहाँ वृश्चिक राशि को सुख की प्राप्ति होगी, वहीं धनु राशि को मानहानि एवं मकर राशि को शारीरिक क्लेश का सामना करना पड़ सकता है। कुंभ राशि हेतु यह स्त्री पक्ष से कष्टकारी तथा मीन राशि हेतु सुख-शांति प्रदायक रहेगा। शास्त्रानुसार, सिंह राशि के जातकों हेतु ग्रहण का दर्शन वर्जित है तथा गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दुष्प्रभाव से रक्षा हेतु विशेष रूप से घर के भीतर रहने का परामर्श दिया गया है।
आर्थिक दृष्टिकोण से इस ग्रहण के फलस्वरूप व्यापारिक वस्तुओं विशेषकर शहद, श्रीफल, कपास, वस्त्र, नमक, चावल,चना, गुड़, जौ, गेहूं, जुवार,अलसी, सरसों ताम्र एवं समस्त रस प्रधान पदार्थों के मूल्यों में आकस्मिक वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
धार्मिक मर्यादा एवं शास्त्रों के विधान के अनुसार, होलिका दहन का पुण्य पर्व 2 मार्च 2026 को प्रदोष काल में संपन्न करना श्रेयस्कर एवं शास्त्र सम्मत होगा।
यह ज्योतिषीय विवरण राजस्थान के ज्योतिष आचार्य पंडित दीनदयाल जी शास्त्री 9425651908 द्वारा प्रदत्त गणनाओं पर आधारित है।



