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मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई बालाघाट ने रेणु को किया याद 

लोकेशन बालाघाट

 

मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई बालाघाट ने रेणु को किया याद

“मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई बालाघाट द्वारा फणीश्वरनाथ रेणु के बाद आँचलिक साहित्य और उसकी स्थिति” विषय पर एक वार्ता और तत्पश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर हुई।

इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं तिरोड़ी शासकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ रामकुमार रामरिया जी ने उपरोक्त विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला और रेणु के पूर्व और पश्चात आँचलिक साहित्य में किये गए कार्यों और उनके रचनाकारों को याद किया। उन्होंने बताया कि आँचलिक साहित्य सृजन का ये सिलसिला 12 वीं शताब्दी से आरम्भ हो गया था ।जिसमे अमीर खुसरो ने विपुल साहित्य की रचना की है। ततपश्चात उन्होंने बाबा नागार्जुन की बलचनमा, रतिनाथ की चाची आदि रचनाओं पर व्यापक चर्चा करते हुए हम सभी का ज्ञान वर्धन किया।

इसी विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार , गीतकार ब्रजेश हजारी ने भी राही मासूम रज़ा की आधा गाँव, की चर्चा की जिसमे हिन्दू मुस्लिम संस्कृति और उनके संघर्षों पर व्यापक चर्चा थी । कार्यक्रम का दूसरा सत्र काव्य गोष्ठी को समर्पित था जिसमे समसामयिक विषयों पर केंद्रित रचनाओं का दौर चला।

 

इस गोष्ठी में उपस्थित कवियों में सर्वश्री नीलम हजारी, सादिक खैरो , शैलेश शैल, तुमेश पटले सारथी , लक्ष्मीचंद ठाकरे, भाऊराव महंत, भूपेश भ्रमर , ब्रजेश हजारी, विजयराज पालेवार , डॉ रामकुमार रामरिया और कुंजकिशोर विरुरकर उपस्थित थे । कार्यक्रम के दोनों ही सत्रों का संचालन कुंजकिशोर विरुरकर ने किया ।

 

अशोक मोटवानी

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Author: aajtak24x7

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