*गुरु पूर्णिमा से पूर्व मोरघडी में संपन्न हुई ‘गुरु संदेश गोष्ठी’, आचार्य हरेराम और लछईराम चौधरी ने बताया गुरु का महत्*
मिश्रीलाल कोहरे
ओंकारेश्वर
गुरु पूर्णिमा पर्व से पूर्व *गाँव मोरघडी* में गुरु संदेश गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को गुरु की महिमा और जीवन में गुरु के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए *मोरघडी शाखा प्रमुख श्री हरेराम आचार्य जी* और *सनावद तहसील से पधारे लछईराम चौधरी जी* ने कहा कि *गुरु कैसा होना चाहिए*। उन्होंने कहा कि गुरु आध्यात्मिक, तपस्वी और युगद्रष्टा होना चाहिए। “आज कान फूंकने वाले गुरु कहीं भी मिल जाएंगे, लेकिन हमारे अपने गुरु तो प्राण और प्यार देने वाले गुरु हैं”।
*गुरु का महत्व पर प्रकाश डालते हुए चौधरी जी ने कहा कि भाईयों-बहनों, गुरु सबका होना चाहिए। बिना गुरु के जीवन ‘निगुरुगा’ है जो एक गाली के समान है। अन्य गुरु अपने शिष्यों को चेला-चपाटी कहते हैं, लेकिन हमारे गुरु देव *आध्यात्मिक तपस्वी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने हम सबको अपना अंग-अवयव कहा है। हमें चोट लगती है तो गुरु को दर्द होता है।
इस अवसर पर उन्होंने जीवन में *16 संस्कारों*के महत्व पर विशेष जोर दिया और कहा कि संस्कारों के बिना जीवन अधूरा है।
कार्यक्रम के अंत में निर्णय लिया गया कि शाखा स्तर पर सभी लोग *एक घंटे का सामूहिक जप* करेंगे। साथ ही बताया गया कि गुरु पूजन पर्व समीप है। *शक्ति पीठ सनावद* और *ओंकारेश्वर* पर गुरु पूर्णिमा पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसमें सभी को सपरिवार शामिल होने का आह्वान किया गया।
गोष्ठी में बड़ी संख्या में ग्रामवासी और शाखा के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


