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पटाखा कारोबार में ‘कच्चे-पक्के’ का खेल? लाखों का माल, हजारों का बिल!

आज तक 24×7 न्यूज़

अशोकनगर जिला ब्यूरो

 

  1. पटाखा कारोबार में ‘कच्चे-पक्के’ का खेल? लाखों का माल, हजारों का बिल

 

थोक बाजार की बिलिंग पर गंभीर सवाल, छोटे फुटकर दुकानदारों के सामने भी बढ़ रहा जोखिम; जीएसटी विभाग से जांच की मांग

 

अशोकनगर। दीपावली से पहले पटाखों का कारोबार तेज होते ही थोक बाजार में माल की बिलिंग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में फुटकर व्यापारियों को लाखों रुपये का पटाखा माल देने के बावजूद पूरे माल की कीमत का पक्का जीएसटी बिल जारी नहीं किया जाता, बल्कि कथित तौर पर केवल कुछ हजार या सीमित राशि का बिल दिया जाता है और शेष माल बिना पर्याप्त दस्तावेज के रह जाता है।

 

मामले को समझने के लिए एक उदाहरण ही काफी है—यदि किसी फुटकर व्यापारी ने करीब ₹2 लाख का पटाखा माल खरीदा और उसे केवल ₹20–30 हजार का पक्का बिल मिला, तो सवाल उठता है कि बाकी माल का लेखा-जोखा किस रिकॉर्ड में दर्ज है? उसका जीएसटी में हिसाब किस तरह दर्शाया गया और वास्तविक बिक्री तथा घोषित कारोबार में कितना अंतर है?

 

सवाल सिर्फ जीएसटी का नहीं, छोटे दुकानदार के नुकसान का भी

 

कथित कम बिलिंग का असर छोटे फुटकर व्यापारियों पर भी पड़ सकता है। दीपावली के दौरान अस्थायी दुकान लगाने वाला व्यापारी थोक कारोबारी से माल खरीदता है। यदि उसके पास मौजूद माल की तुलना में खरीद बिल काफी कम मूल्य का है और जांच के दौरान उससे पूरे स्टॉक के दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो उसे शेष माल की खरीद साबित करने में परेशानी हो सकती है।

 

यानी जिस माल का पूरा भुगतान व्यापारी कर चुका है, उसी माल का पूरा वैध खरीद दस्तावेज उसके पास नहीं होने की स्थिति में जोखिम आखिर किसके हिस्से आएगा?

 

पुरानी शिकायत के बाद भी उठ रहे सवाल

 

मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, कम बिलिंग से संबंधित शिकायत पहले भी जीएसटी विभाग के समक्ष की जा चुकी है। इसके बावजूद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि शिकायत के बाद विभाग ने वास्तविक रूप से क्या जांच की।

 

क्या संबंधित थोक व्यापारी के जीएसटी रिटर्न और वास्तविक बिक्री का मिलान हुआ?

 

क्या खरीद बिल और बिक्री बिल की जांच हुई?

 

क्या स्टॉक रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का सत्यापन हुआ?

 

क्या ई-वे बिल और माल की वास्तविक आवाजाही का मिलान किया गया?

 

क्या बिना बिल अथवा कम बिल वाले माल की कोई जांच की गई?

 

और यदि जांच में कोई अनियमितता मिली थी, तो उसके आधार पर नियमानुसार क्या कार्रवाई की गई?

 

बिल से लेकर गोदाम तक जांच हो तो सामने आ सकता है पूरा सच

 

यदि संबंधित कारोबार की निष्पक्ष जांच की जाती है तो पिछले वर्षों के जीएसटी रिटर्न, टैक्स इनवॉइस, खरीद रिकॉर्ड, स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड, ई-वे बिल और वास्तविक माल की आवाजाही का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

 

इन रिकॉर्डों को आपस में मिलाने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि कारोबार में वास्तव में कितना माल आया, कितना बेचा गया, कितने मूल्य के बिल जारी हुए और जीएसटी रिकॉर्ड में कितना कारोबार घोषित किया गया।

 

दीपावली से पहले विशेष जांच की जरूरत

 

पटाखों के कारोबार में दीपावली के दौरान अचानक कारोबार बढ़ने को देखते हुए यह जरूरी है कि संबंधित विभाग केवल फुटकर दुकानदारों के स्टॉक और बिल की जांच तक सीमित न रहे, बल्कि थोक स्तर पर माल की खरीद, बिक्री, बिलिंग और जीएसटी रिकॉर्ड की भी जांच करे।

 

यदि जांच में वास्तविक कारोबार और दस्तावेजों के बीच अंतर पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति/व्यापारी के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

अब बड़ा सवाल यही है—क्या जीएसटी विभाग थोक पटाखा कारोबार में कथित कम बिलिंग की शिकायतों को गंभीरता से लेकर वास्तविक स्टॉक और जीएसटी रिकॉर्ड का मिलान करेगा?

 

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अशोकनगर जिला ब्यूरो

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Author: aajtak24x7

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