1857 की क्रांति के अमर बलिदानी महाराव राजा बख्तावरसिंह जी के ऐतिहासिक किले का होगा जिर्णाेद्धार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के द्वारा स्वीकृत राशि 2 करोड़ 48 लाख से वर्षाे पुराना सपना होगा साकार ******

लोकेशन अमझेरा ( धार )
जिला ब्यूरो दिलीप पाटीदार

अमझेरा – वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अमझेरा के महाराव राजा बख्तावरसिंह के द्वारा देश की आजादी के लिए अंग्रेजो से युद्ध करते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दे दिया था । ऐसे वीर सपुत क्रांतिकारी योद्धा के अमझेरा स्थित किले के जिर्णाेद्धार के लिए राशी स्वीकृत हो गई है जिसके तहत करीब ढाई करोड़ की लागत से राजा बख्तावरसिंहजी के कीले का संरक्षण एवं कायाकल्प होगा। ग्राम अमझेरा सहीत क्षेत्र की जनता का बहुप्रतिक्षित राजा के किले के जीर्णाेद्धार का सपना मुख्यमंत्री मोहन यादव के सार्थक प्रयासो के परिणाम से मुर्त रूप लेने जा रहा है जिनके द्वारा किले के जीर्णाेद्धार के लिए राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है । जीर्णाेद्धार का यह कार्य मध्यप्रदेष राज्य पर्यटन विकास विभाग के द्वारा किया जाना है। इस संबंध में पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमल यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि अमझेरा किले के जीर्णाेद्धार और राष्ट्र स्तरीय शहीद गैलरी के लिए वर्षाे से मांग लंबित थी तथा अमझेरा सहीत क्षेत्रिय जनता व जनप्रतिनिधि लगातार प्रयासरसत थे वहीं पत्रकारों के द्वारा भी लगातार समाचारो के माध्यम से किले के जीर्णाेद्धार की मांग को उठाया गया था इस संबंध में वे स्वयं भी लगातार मुख्यमंत्री को मांग पत्र के माध्यम से अवगत कराते आ रहे थे ,उनके द्वारा अमझेरा नगर आगमन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पुनः मांग पत्र सौंपा था जिस पर उनके द्वारा शीघ्र ही कार्यवाही करते हुए राशि स्वीकृति कर विभाग को निर्देशित किया गया,उन्हे म.प्र.राज्य पर्यटन विकास निगम लि. पर्यटन भवन भोपाल से पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें बताया गया कि सरदारपुर विधानसभा के ग्राम अमझेरा में स्थित राजा बख्तावरसिंह की गढ़ी के संरक्षण एवं विकास कार्य हेतु 248.28 लाख रूपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पुरातत्व संचालनालय भोपाल को टैंडर स्वीकृति हेतु प्रेषित की गई है। इसी के साथ माता अमका-झमका मंदिर श्री कृष्ण रूक्मणी हरण स्थली ,राजराजेष्वर महादेव मंदिर का भी सर्वे किया जा चुका है जिसकी डी पी आर तैयार की जा रही है जल्द ही राशि स्वीकृति होने पर श्री कृष्ण रूखमणी लोक का निर्माण कर तीर्थ के रूप में विकसीत किया जाएगा।
10 फरवरी को मनाया जाता है बलिदान दिवस- अमर शहीद महाराव बख्तावरसिंहजी जिन्हे इन्दौर में अंग्रेजो के द्वारा 10 फरवरी 1858 को फांसी दे दी गई थी तथा उसके बाद से ही 10 फरवरी का दिन बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता चला आ रहा है ऐसे में आने वाली 10 फरवरी के पूर्व किले के जीर्णोद्धार की खबर से लोगो में हर्ष व्याप्त है।
इस संबंध में पुरातत्व अधिकारी श्री पाण्डे ने बताया कि राजा बख्तावरसिंह की गढ़ी के लिए राषी स्वीकृत हुई है जिससे किले के अंदर स्थित महलों को म.प्र.पर्यटन विभाग के द्वारा विकसीत किया जाएगा इसके साथ ही चारभुजानाथ मंदिर के लिए भी राशि स्वीकृत हो चुकी हैं जिसका कायाकल्प पुरातत्व विभाग के द्वारा किया जावेगा।
चित्र – 31 अमझेरा 01 महाराव राजा बख्तावरसिंहजी
31 अमझेरा 02 राजा बख्तावरसिंहजी का जीर्ण-क्षीर्ण चौमुखा महल
31 अमझेरा 03 किले के अंदर स्थित जीर्ण-क्षीर्ण रानी महल

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Author: aajtak24x7

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