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.निराश्रित गौवंशीय पशुओं के प्रति पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी उदासीन, लोगों में रोष

अमरोहा………जनपद. तहसील हसनपुर……….
हसनपुर। जहाँ एक ओर सरकारी गौशालाओं में बीमारियों से जूझते गौवंशीय पशुओं की स्थिति बदहाल है, वहीं दूसरी ओर जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों में घूमते कमजोर और छोटे गौवंश हिंसक कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग की यह गंभीर लापरवाही ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जिससे विभाग के प्रति गहरा रोष उत्पन्न हो रहा है। शनिवार सुबह हसनपुर क्षेत्र के ग्राम सकतपुर में एक हृदय विदारक घटना सामने आई। गाँव निवासी खेत स्वामी जोगेंद्र प्रजापति ने जंगल में एक गौवंशीय पशु को कुत्तों द्वारा नोचते हुए देखा। पशु की चीखें सुनकर जोगेंद्र तुरंत मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर अन्य किसानों की मदद से गौवंश को कुत्तों से बचाया। घायल पशु की गंभीर स्थिति को देखते हुए, जोगेंद्र ने तुरंत हसनपुर पशु अस्पताल के डॉ. चरणजीत सिंह से संपर्क किया और सहायता मांगी।
हालांकि, डॉ. चरणजीत का जवाब चौंकाने वाला और निराशाजनक था। उन्होंने जोगेंद्र को घायल पशु को किसी नजदीकी गौशाला ले जाने की सलाह दी। जोगेंद्र घायल गौवंश को लेकर चकूनी गौशाला पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। गौशाला संचालक ने पशु को लेने से साफ इनकार कर दिया, जिससे जोगेंद्र और भी हताश हो गए।
मजबूरन, जोगेंद्र घायल पशु को वापस लेकर आए और एक बार फिर डॉ. चरणजीत सिंह को फोन किया। इस बार डॉ. का रवैया और भी कठोर था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। जब जोगेंद्र ने उच्च अधिकारियों से मिलने की बात कही, तो डॉ. चरणजीत ने बेरुखी से जवाब दिया, “कहीं भी चले जाओ, मैं इसमें आपकी मदद नहीं कर सकता।। राष्ट्र सेवी संगठन के संयोजक और भारतीय किसान संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा और पशु कल्याण समिति के नामित सदस्य डॉक्टर रूमाल सिंह सैनी का कहना है कि
डॉ. चरणजीत की इस हठधर्मिता और असंवेदनशीलता से किसानों में भारी रोष है। इसके बाद अपनी समस्या के समाधान के लिए, किसान थाना सैदनगली में आयोजित समाधान दिवस पर पहुंचे, जहाँ जिलाधिकारी अमरोहा, निधि वत्स, जनसुनवाई कर रही थीं। किसानों ने जिलाधिकारी को पूरी घटना से अवगत कराया और पशु चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
जिलाधिकारी निधि वत्स ने किसानों की समस्या को गंभीरता से सुना और मामले की तत्काल जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जिलाधिकारी ने अपने अधीनस्थों को घायल गौवंशीय पशु को तत्काल गौशाला भिजवाने के निर्देश दिए, जिससे उसे उचित इलाज और देखभाल मिल सके।
इस घटना ने एक बार फिर निराश्रित गौवंश के प्रति पशु चिकित्सा विभाग के उदासीन रवैये को उजागर किया है। यह देखना होगा कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद विभाग अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कितना गंभीर होता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।……… सवाददाता…… मुशीर खान. अमरोहा. उत्तरप्रदेश

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Author: aajtak24x7

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