ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर विवाद मंदिर निर्माण कार्य में गैर-सनातनी श्रमिकों की संलिप्तता पर हिन्दू महासभा ने जताई आपत्ति, संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 का दिया हवाला


मुकेश शुक्ला
खंडवा /ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर क्षेत्र में चल रहे टीन शेड निर्माण कार्य को लेकर धार्मिक विवाद गहरा गया है। कार्य में शामिल गैर-सनातनी श्रमिकों की उपस्थिति पर संत समाज के बाद अब अखिल भारत हिन्दू महासभा एवं राष्ट्रीय हिंदू महासभा भारत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पदाधिकारी ने मंदिर की पवित्रता बनाए रखने की मांग करते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला दिया है।

नदीगण हॉल से कमानी द्वार तक जारी निर्माण कार्य को लेकर यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय महंतो एवं संतों के साथ ही स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि कार्य में संलिप्त श्रमिक मांसाहारी और गैर-सनातनी हैं, जो मंदिर परिसर की मर्यादा और शुद्धता के विपरीत है। कार्य रोकने के बाद विवाद ने तूल पकड़ा जब प्रशासन की ओर से पुनासा एसडीएम श्री शिवम प्रजापति ने मीडिया को बताया – “संविधान में कहीं नहीं लिखा कि किसी विशेष धर्म के लोग ही धार्मिक स्थल पर कार्य करें। हम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्य करवा रहे हैं।”

एसडीएम के बयान पर हिन्दू महासभा ने जताई आपत्ति

अखिल भारत हिन्दू महासभा, जिला खंडवा के संगठन मंत्री पंड़ित जीतू दुबे ने प्रशासन के बयान को संविधान की गलत व्याख्या बताते हुए कहा – “भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक आस्था और उसके पालन का अधिकार देता है, और अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपनी परंपराओं के अनुसार प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। मंदिर परिसर में कार्य कौन करेगा, इसका निर्णय मंदिर की परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर कोई सामान्य सरकारी स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत धार्मिक क्षेत्र है, जहाँ कार्यरत व्यक्ति की शुद्धता और आचरण भी उतना ही आवश्यक है जितना उसका कार्य कौशल।

हिन्दू महासभा की माँगें – मंदिर क्षेत्र में केवल आस्थावान सनातनी हिन्दू श्रमिकों को कार्य करने की अनुमति दी जाए।
भविष्य के किसी भी निर्माण कार्य में स्थानीय संत समाज और धार्मिक संगठनों की सलाह अनिवार्य की जाए।
संविधान की आड़ में सनातन धर्म परम्पराओं का अपमान बंद करें प्रशासनिक अधिकारी ।
मंदिर ट्रस्ट को अनुच्छेद 26 के तहत पूर्ण धार्मिक अधिकार दिए जाएं, जिसमें कार्यशैली का निर्धारण शामिल हो।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासनिक नियमों से ऊपर धार्मिक स्थल की मर्यादा होती है। एक वरिष्ठ श्रद्धालु ने कहा – “बरसात से बचने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन धर्म से विचलित होकर नहीं। जो हाथ मंदिर में सेवा करें, वे आस्थावान और शुद्ध हों—यह अपेक्षा अनुचित नहीं है। अब देखना यह होगा कि विरोध आपत्ती के बाद प्रशासन क्या एक्शन लेता है

*हिन्दू महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने हिन्दू भावनाओं का सम्मान नहीं किया, तो वह संत समाज के साथ मिलकर शांतिपूर्ण जन आंदोलन का मार्ग अपनाएगी।

“हमें संविधान से अधिकार भी मिले हैं और धर्म से मर्यादा भी। हम दोनों की रक्षा करेंगे।” — पं. जीतू दुबे*

aajtak24x7
Author: aajtak24x7

0% LikesVS
100% Dislikes

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज

मौसम का हाल

मौसम डेटा स्रोत: https://weatherlabs.in