*ग्वालियर विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों से साफ हुई तस्वीर, सत्ता के केंद्र में अब भी सिंधिया
*ग्वालियर।* ग्वालियर के विकास की रूपरेखा तय करने वाली दो सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं ग्वालियर विकास प्राधिकरण और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में हालिया नियुक्तियों ने प्रदेश की राजनीति में एक स्पष्ट संदेश दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि इन पदों के लिए खींचतान लंबी चलेगी, लेकिन अंतिम सूची ने यह साफ कर दिया है कि ग्वालियर के निर्णयों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा प्रभाव रहता है। दरअसल जिन लोगों की नियुक्ति हुई है, उन्हें सिंधिया के खेमे का माना जाता है।
*आर्थिक शक्ति केंद्रों पर सिंधिया के खेमे के लोगों की नियुक्तियां*
जीडीए और साडा केवल के मुख्य पदों पर नियुक्तियों को लेकर जो हालिया विश्लेषण सामने आए हैं, वे इशारा करते हैं कि यह केवल संगठन की मजबूती नहीं, बल्कि सिंधिया के दबदबे का परिणाम है।
*ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA):* यहाँ अध्यक्ष पद पर मधुसूदन भदौरिया की नियुक्ति में सिंधिया की रजामंदी और उपाध्यक्ष के रूप में सुधीर गुप्ता व वेद प्रकाश शिवहरे का चयन सीधे तौर पर सिंधिया खेमे की मजबूती को दर्शाता है क्योंकि इन्हें सिंधिया के खेमे का माना जाता है।
*विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA):* ग्वालियर के भविष्य के विस्तार के लिए जिम्मेदार इस संस्था की कमान अशोक शर्मा को सौंपी गई है, जबकि हरीश मेवाफरोश को उपाध्यक्ष बनाया गया है। ये दोनों भी सिंधिया के खेमे के लोग माने गए हैं।
*सत्ता का स्पष्ट संतुलन*
इन नियुक्तियों के बाद अब यह स्पष्ट है कि ग्वालियर के विकास निर्णयों में सिंधिया की भूमिका और उनका दबदबा न केवल कायम है, बल्कि पहले से कहीं अधिक संगठित और सशक्त होकर उभरा है।



