जांच लंबित, फिर भी धर्मकांटों की BOT निविदा आगे बढ़ी! अशोकनगर मंडी में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल, मुख्यमंत्री से तत्काल रोक लगाने की मांग

रिपोर्ट: सौरभ जैन

जिला ब्यूरो चीफ – आज तक 24×7, अशोकनगर

 

जांच लंबित, फिर भी धर्मकांटों की BOT निविदा आगे बढ़ी! अशोकनगर मंडी में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल, मुख्यमंत्री से तत्काल रोक लगाने की मां

 

अशोकनगर। अशोकनगर कृषि उपज मंडी में धर्मकांटों की BOT निविदा प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। शिकायतकर्ता सौरभ जैन ने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री तथा मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक को विस्तृत शिकायत भेजकर वर्तमान BOT निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

 

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने दिनांक 08 जून 2025 एवं 27 जून 2025 को अशोकनगर कृषि उपज मंडी में संचालित धर्मकांटों की वैधानिकता, BOT निविदा प्रक्रिया, अनुबंध, संचालन, शासन को संभावित राजस्व हानि एवं अन्य गंभीर अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायतें प्रस्तुत की थीं। शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त जानकारी एवं दस्तावेज भी मांगे गए, जिससे स्पष्ट था कि मामला जांचाधीन है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने आवश्यक फोटो, वीडियो एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी थी।

 

इसके बावजूद शिकायतों का अंतिम निराकरण एवं जांच पूरी किए बिना ही नई BOT निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल—पहले से संचालित धर्मकांटे आखिर किस आधार पर चल रहे थे?

 

शिकायत में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं। यदि अशोकनगर नवीन कृषि उपज मंडी में पहले से दो धर्मकांटे संचालित थे, तो उनकी मूल नीलामी कब हुई? अनुबंध किसके नाम हुआ? किस सक्षम अधिकारी के आदेश से उनका संचालन किया गया? वर्ष 2019 से 2026 तक उनसे शासन को कितना राजस्व प्राप्त हुआ और वह किस खाते में जमा किया गया? यदि धर्मकांटे विधिसम्मत रूप से संचालित थे, तो उन्हीं स्थानों के लिए पुनः BOT निविदा जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि उनका संचालन नियमों के विरुद्ध था, तो लगभग सात वर्षों तक संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

व्यापारियों को भी नहीं थी जानकारी, गुपचुप तरीके से आगे बढ़ी प्रक्रिया?

 

शिकायतकर्ता का कहना है कि अशोकनगर मंडी के अधिकांश व्यापारियों को इस BOT निविदा प्रक्रिया की कोई जानकारी ही नहीं थी। उनके अनुसार केवल कुछ चुनिंदा लोगों को अंतिम समय में इसकी सूचना मिली, जिसके बाद निविदा संबंधी आदेश सामने आया। यदि समय पर व्यापक सूचना का प्रकाशन किया गया होता, तो अधिक से अधिक पात्र व्यापारी निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकते थे।

 

इसी कारण अब निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में मांग की गई है कि इस पहलू की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए कि क्या निविदा संबंधी सूचना का नियमानुसार व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया था अथवा नहीं।

 

मुख्यमंत्री से BOT निविदा पर तत्काल रोक लगाने की मांग

 

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जांच पूरी होने तक धर्मकांटों की वर्तमान BOT निविदा प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा किसी भी प्रकार का नया अनुबंध, स्वीकृति या संचालन की अनुमति न दी जाए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने से पहले निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाना न केवल जनहित बल्कि शासनहित के भी विपरीत होगा।

 

2019 से अब तक के सभी रिकॉर्ड की जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2019 से वर्तमान तक धर्मकांटों से संबंधित सभी निविदाएं, अनुबंध, स्वीकृति आदेश, नोटशीट, आय-व्यय, राजस्व, भुगतान, बैंक जमा एवं अन्य अभिलेख तत्काल सुरक्षित किए जाएं तथा पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय समिति या सक्षम एजेंसी से कराई जाए।

 

साथ ही यदि जांच में नियमों का उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाए।

 

साक्ष्य प्रस्तुत करने को तैयार

 

शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके पास पूरे मामले से संबंधित फोटो, वीडियो एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें वे किसी भी सक्षम जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी पूर्व शिकायतों पर की गई कार्रवाई का बिंदुवार लिखित उत्तर भी मांगा है।

 

जांच नहीं हुई तो न्यायालय जाने की चेतावनी

 

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि बिना निष्पक्ष जांच के BOT निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, तो वे अपने उपलब्ध साक्ष्यों सहित सक्षम न्यायालय एवं अन्य वैधानिक मंचों का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

 

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और BOT निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाने, निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई के संबंध में क्या निर्णय लेते हैं।

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Author: aajtak24x7

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