राम मंदिर महाघोटाला: रिमांड पर आए अविनाश का कबूलनामा— “हर दिन पार करते थे लाखों, टिन्नू डिलीट करता था फुटेज”; चढ़ावे के पैसे से खरीदी ब्रेजा कार बरामद 

राम मंदिर महाघोटाला: रिमांड पर आए अविनाश का कबूलनामा— “हर दिन पार करते थे लाखों, टिन्नू डिलीट करता था फुटेज”; चढ़ावे के पैसे से खरीदी ब्रेजा कार बरामद

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी महाघोटाले में 24 घंटे की विधिक कस्टडी रिमांड पर आए मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त पूछताछ में कई ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिसने पूरे ट्रस्ट प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी अविनाश की सटीक निशानदेही पर गबन की राशि से खरीदी गई एक लग्जरी ब्रेजा कार को बरामद कर सीज कर दिया है। रिमांड की विधिक समयावधि पूरी होने के बाद शुक्रवार की देर रात करीब 10:30 बजे पुलिस ने आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा जिला कारागार (जेल) में दाखिल करा दिया है।

 

प्राप्त विधिक इनपुट के अनुसार, अयोध्या पुलिस ने बीते 26 जून 2026 को इस महाघोटाले के मुख्य चेहरों— टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। इसके बाद विवेचक ने अदालत से विशेष अनुमति लेकर जेल के भीतर ही आरोपियों से कई घंटों तक जिरह की थी। इसी कड़ी में साक्ष्यों के भौतिक सत्यापन और रिकवरी के लिए पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की कस्टडी रिमांड मांगी थी, जिसे विधिक कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। शुक्रवार की सुबह करीब 10:00 बजे पुलिस टीम अविनाश को जेल से लेकर बाहर निकली और सीधे एसओजी कार्यालय पहुंची। वहां हुई मैराथन पूछताछ के बाद पुलिस उसे साक्ष्यों के मिलान के लिए लेकर गई, जहां उसकी निशानदेही पर वह ब्रेजा कार बरामद हुई, जिसे अविनाश ने भगवान के खजाने से चुराए गए पैसों से खरीदा था। इससे पूर्व पुलिस अविनाश के पास से 20.39 लाख रुपये की भारी नकदी और 1,000 अमेरिकी डॉलर भी बरामद कर चुकी है।

 

पुख्ता प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने मंदिर के भीतर चल रहे इस काले सिंडिकेट का पूरा सच उगल दिया है। अविनाश ने कुबूल किया कि, “वह और उसके साथी मिलकर लगभग हर रोज दानपात्रों से लाखों रुपये पार कर देते थे और यह सिलसिला बेहद लंबे समय से अनवरत चल रहा था।” अविनाश ने बताया कि करीब एक साल पहले जब उसने मंदिर के ‘रामराज्य कोष’ (कैश काउंटिंग विभाग) में नौकरी ज्वाइन की थी, तब से वह भी इस शातिर सिंडिकेट का सक्रिय हिस्सा बन गया था।

 

जब पुलिस ने उससे पूछा कि सीसीटीवी कैमरों और कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद उसे पकड़े जाने का डर क्यों नहीं था, तो अविनाश ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे खेल में मुख्य सुरक्षा व निगरानी प्रभारी टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की सीधी विधिक व आपराधिक मिलीभगत थी। टिन्नू यादव हमेशा ढांढस बंधाता था कि, “तुम लोग धड़ल्ले से पैसे निकालो, कहीं कुछ नहीं होगा; सीसीटीवी कैमरे के जो भी संदिग्ध फुटेज होंगे, उन्हें बैकएंड से पूरी तरह डिलीट कर दिया जाएगा और यहाँ बाहर किसी की इतनी हैसियत नहीं है जो हमें टोक सके।” अविनाश ने बताया कि टिन्नू की इसी आंतरिक जिम्मेदारी और शह के कारण किसी भी सुरक्षाकर्मी या अधिकारी ने उसे कभी चेक नहीं किया, जिससे वे रोज करोड़ों के चढ़ावे में से लाखों रुपये आसानी से बैग में भरकर बाहर ले जाते रहे।

 

सूत्रों ने आगे बताया कि चोरी की गई यह विशाल धनराशि सभी आरोपियों के बीच बराबर-बराबर हिस्सों में बांटी जाती थी, हालांकि मुख्य सरगना टिन्नू यादव कभी-कभार अपना बड़ा हिस्सा दबा लेता था। अविनाश ने इसी पाप की कमाई से न सिर्फ चमचमाती ब्रेजा कार खरीदी, बल्कि अपने पैतृक गांव में एक आलीशान मकान बनवाया और अपने सगे भाई को भी व्यवसाय सेट करने के लिए लाखों रुपये नकद दिए।

 

इस बीच, मामले की विधिक विवेचना कर रही अयोध्या पुलिस को केस डायरी मजबूत करने और गबन की गई शेष धनराशि व जेवरात की शत-प्रतिशत रिकवरी के लिए कुछ अन्य मुख्य कड़ियों की तलाश है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पुलिस इस सिंडिकेट के अन्य प्रमुख किरदारों (जैसे टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव) को भी आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने के लिए अगले एक-दो दिनों के भीतर विधिक कोर्ट में दोबारा कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

 

इसके साथ ही, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की जांच अब इस बिंदु पर आकर टिक गई है कि प्रतापगढ़ के रहने वाले एक सामान्य युवक अविनाश शुक्ला की एंट्री राम मंदिर जैसे देश के सबसे संवेदनशील वीआईपी परिसर में आखिर किसके विधिक रसूख के जरिए हुई थी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि उसकी भर्ती की मुख्य सिफारिश ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने की थी, लेकिन पुलिस अब उस ‘टूटती कड़ी’ या बिचौलिये को तलाश रही है जिसने अविनाश को अनिल मिश्रा से मिलवाया था। तकनीकी रूप से अविनाश एक राष्ट्रीयकृत बैंक की तरफ से आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में चेस्ट रूम में रखा गया था, जिसके चयन के लिए सीधे राम मंदिर ट्रस्ट ने ही पुरजोर विधिक पैरवी की थी, जिसकी फाइलें अब एसआईटी खंगाल रही है।

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Author: aajtak24x7

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