लोकेशन/ सोनभद्र उत्तर प्रदेश
रिपोर्ट/ कन्हैयालाल केशरी
*मझवार–तुरैहा समेत निषाद, केवट, मल्लाह आदि जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करने की मांग, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक सौंपा गया ज्ञापन
डाला सोनभद्र – निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने को लेकर आज निजात पार्टी के सदस्यों द्वारा माननीय समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ को उनके आवास पर ज्ञापन सोपा गया जिसमें उत्तर प्रदेश में मझवार, तुरैहा तथा उनसे संबंधित निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुआ सहित अन्य जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर आज महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय गृहमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, माननीय मुख्यमंत्री तथा प्रदेश के समस्त जिला अधिकारियों एवं उपजिलाधिकारियों को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि कार्मिक अनुभाग-2 की अधिसूचना संख्या 4(1)/2002-का-2 दिनांक 31 दिसंबर 2016 तथा संख्या 1/2017/4(1)/2002-का-2 दिनांक 12 जनवरी 2017 के अनुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 में संशोधन कर निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी एवं मछुआ जातियों को पिछड़े वर्ग की सूची से हटाया गया था। इसके बावजूद जनपद एवं तहसील स्तर पर इन जातियों के लोगों को अभी भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है, जिसे ज्ञापन में शासनादेश एवं संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।
ज्ञापन में 10 अगस्त 1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना, 1961 के सेंसस मैन्युअल, 29 अगस्त 1977 के भारत सरकार के शासनादेश तथा विभिन्न राजस्व परिषद अभिलेखों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि मझवार, तुरैहा तथा उनकी पर्यायवाची जातियां अनुसूचित जाति के समूहों में सूचीबद्ध हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के कई अन्य राज्यों में इन जातियों को अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 2016 एवं 2017 के संबंधित शासनादेशों का प्रदेशभर में प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करे तथा संबंधित जातियों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। साथ ही पात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र जारी किए जाएं और अनुसूचित जाति के अंतर्गत मिलने वाली सभी संवैधानिक सुविधाएं एवं योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
इसके अतिरिक्त मांग की गई कि उत्तराखंड की तर्ज पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में आवश्यक अध्यादेश, शासनादेश अथवा विधेयक लाकर मझवार, तुरैहा एवं तरमाली पासी समूह की पर्यायवाची जातियों की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित की जाए। साथ ही ओबीसी के 9 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग आरक्षण से संबंधित इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल कर अनुसूचित जाति के आरक्षण में समायोजन करने तथा सभी उपजिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने वालों ने कहा कि इस संबंध में शीघ्र निर्णय लेकर प्रदेशभर में एक समान व्यवस्था लागू की जाए, जिससे संबंधित समुदायों को उनके अनुसार संवैधानिक अधिकार एवं प्रमाणपत्र प्राप्त हो सकें। मौके पर जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद, दयाशंकर निषाद प्रदेश महासचिव, शिवेंद्र निषाद जिला संयोजक, छोटेलाल साहनी, राम सुंदर, मुनिया देवी ,पिंटू, प्रदीप,फूलचंद चौधरी, विनय, राकेश,लाल साहब, लाल जी, विनोद चौधरी,राज नारायण, आदि लोग मौजूद रहे



