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तानसेन संगीत समारोह-2024: पूरब-पश्चिम के संगीत संगम से सराबोर हुआ ग्वालियर

ग्वालियर, 19 दिसंबर 2024: तानसेन संगीत समारोह के 100वें संस्करण की सांध्यकालीन सभा में संगीत की भावनात्मक मिठास ने प्रेम, विरह और श्रृंगार की अनुपम अनुभूति कराई। भारतीय शास्त्रीय संगीत के मूर्धन्य साधकों और यूरोप के इटली से पधारे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरब और पश्चिम की सांगीतिक परंपराओं का संगम प्रस्तुत किया।

मुख्य आकर्षण:

  1. ध्रुपद गायन से आरंभ:
    श्री साधना संगीत महाविद्यालय, ग्वालियर के गुरु-शिष्यों ने राग मारुबिहाग में ध्रुपद “गणपति गणनायक सिद्धि सदन…” प्रस्तुत कर ईश्वर को समर्पित एक दिव्य आरंभ किया।
  2. सितार की धुनों का जादू:
    इटली के कलाकार श्री रेमो स्केनो ने राग यमन में आलाप, जोड़ और झाला से रसिक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनकी प्रस्तुति में युवा तबला वादक श्री मनोज पाटीदार ने बखूबी संगत दी।
  3. पं. स्वपन चौधरी का तबला वादन:
    पद्मश्री पं. स्वपन चौधरी के माधुर्य भरे तबला वादन ने श्रोताओं को अभिभूत कर दिया। लखनऊ घराने की परंपरानुसार तीन ताल में उनके वादन ने कायदे, रेले और गतों से समां बांध दिया। उनकी प्रस्तुति उस्ताद जाकिर हुसैन को समर्पित थी।

संगीत का संदेश:

संगीत प्रेम का शाश्वत माध्यम है, जो सरहदों से परे दिलों को जोड़ता है। तानसेन संगीत समारोह की इस सांध्य सभा ने यही संदेश एक बार फिर से स्थापित किया।

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Author: aajtak24x7

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