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सिरोंज। यदि समाधि की साधना देखना हो तो इंदौर आकर देखे। यह बात इंदौर सुनील भैया जी ने हरिभूमि संवाददाता राजीव जैन सैनानी से चर्चा के दौरान कही। वही उन्होने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से २५ वर्ष पहले दो प्रतिमाओं के व्रत ग्रहण कर पूरा जीवन संयम के साथ व्यतीत करने वाले पंडित रतनलाल शास्त्री की समाधि चल रही है। नागरिक कहते है कि पंडित जो होते है वह कभी व्रतो को ग्रहण नहीं करते समाधि नहीं लेते किंतु इन सब बातो को झुठलाकर पंडित रतनलाल शास्त्री जी ने आचार्य श्री से आजीवन ब्रह्मचर्यव्रत और दो प्रतिमाएं लेकर आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत प्रतिमाओं का पालन करते हुए अंतिम लक्ष्य प्राप्ति की और आचार्य श्री समयसागर जी महाराज से नवमी प्रतिमा के व्रत लेकर सिर्फ जल ग्रहण कर रहे है। इंदौर समवशरण मंदिर में सल्लेखना रतनलाल पंडित जी को आचार्य श्री समयसागर जी महाराज द्वारा दिए गए नाम आत्मानंद सागर महाराज की सेवा में उदासीन आश्रम के सभी ब्रह्मचारी भैया लोग पूरी तरह से समर्पित है।


